मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसभा में किया ऐलान, मंत्री कपिल देव अग्रवाल को प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश
मुजफ्फरनगर। जनपद में मुख्यालय पर आये सीएम योगी आदित्यनाथ ने मुजफ्फरनगर को नगर निगम में परिवर्तित करने की दिशा में सरकार के द्वारा उठाये जा रहे कदम की जानकारी सार्वजनिक करते हुए मंच से ऐलान कर दिया। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद शहर के प्रशासनिक ढांचे और विकास योजनाओं को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। यदि ये प्रस्ताव पारित हुआ तो मुजफ्फरनगर पालिका उत्तर प्रदेश में 18वां नगर निगम बन सकती है।
मुजफ्फरनगर के नुमाइश मैदान में सेामवार को आयोजित रोजगार मेले और जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहर को नगर निगम बनाने की योजना का ऐलान किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर अब उस स्तर पर पहुंच चुका है, जहां उसे तेज़ और संगठित शहरी विकास की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने इस दौरान मंत्री कपिल देव अग्रवाल को निर्देश दिए कि नगर मुजफ्फरनगर को नगर पालिका परिषद से नगर निगम बनाने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाए। इस घोषणा के बाद स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने भीमराव अंबेडकर के संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि यही संविधान देश को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। इसी के कारण हम विकास के दायरे को भी बढ़ा रहे हैं, शहरों का विस्तार और उच्चीकरण हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर का भौगोलिक और आर्थिक विस्तार तेजी से हुआ है, जिससे इसे अब पालिका से महापालिका का स्वरूप देना समय की मांग बन गया है। मुख्यमंत्री ने मुजफ्फरनगर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की योजना भी साझा की। नगर निगम बनने की इस घोषणा के बाद मुजफ्फरनगर में विकास योजनाओं के विस्तार, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और शहरी सुविधाओं के उन्नयन की उम्मीदें बढ़ गई हैं। वहीं मुख्यमंत्री की घोषणा से नई सियासी हलचल भी शुरू हो गई है।
पांच बार खारिज हो चुका पालिका को निगम बनाने का प्रस्ताव
बता दें कि वर्तमान में नगरपालिका का नेतृत्व मीनाक्षी स्वरूप कर रही हैं, और बोर्ड का कार्यकाल लगभग तीन वर्ष ही पूरा हुआ है। ऐसे में नगर निगम बनने की प्रक्रिया के साथ बोर्ड के भविष्य को लेकर भी अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं। सियासी लोग सीएम योगी की घोषणा के नफे नुकसान को लेकर चर्चा करने में जुट गये हैं, यहां तक की मीनाक्षी स्वरूप के बोर्ड के कार्यकाल को लेकर भी चर्चा होने लगी हैं।
उल्लेखनीय है कि मुजफ्फरनगर पालिका को नगर निगम बनाने की हलचल कोई नई नहीं है। आज सरकार में मंत्री कपिल देव अग्रवाल जब नगर पालिका के अध्यक्ष थे, उनके कार्यकाल में पहली बार यह सुगबुगाहट शुरू हुई थी। शासन से आये प्रस्ताव को पालिका के बोर्ड में पहली बार रखा गया था और बोर्ड ने इसे अपने चेयरमैन कपिल देव के हक में एकजुट होकर खारिज कर दिया था। इसके बाद कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुए चेयरमैन पंकज अग्रवाल के समय में भी निगम बनने का प्रस्ताव शासन से आया, लेकिन बोर्ड ने इसको फिर से खारिज कर दिया।
बाद में कांग्रेसी चेयरमैन अंजु अग्रवाल के कार्यकाल में पालिका को निगम बनाने का प्रस्ताव कुल तीन बार आया। जनवरी 2019 में यहां आये प्रदेश के नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना को टाउनहाल सभा के दौरान ही मंत्री कपिल देव ने मुजफ्फरनगर पालिका को नगर निगम बनाने के लिए पत्र दिया था। इसको लेकर वहां पर मंच पर ही सभासदों ने विरोध किया और भारी हंगामा हुआ था। शासन से तीन बार प्रस्ताव पालिका को भेजा गया, लेकिन अंजु अग्रवाल के बोर्ड में तीनों बार इसे सर्वसम्मति से खारिज किया गया और यह ठंडे बस्ते में चला गया।
साल 2022 में मुजफ्फरनगर पालिका का हुआ विस्तार, 15 गांव जुड़े
मुजफ्फरनगर नगरपालिका परिषद् का सीमा विस्तार कर 11 प्रमुख गाँवों वहलना, सरवट, कूकड़ा, सूजडू, मन्धेड़ा, खान्जापुर, शाहबुद्दीनपुर, अलमासपुर, मीरापुर, सहावली और बीबीपुर की आबादी सहित 15 गाँवों के 4500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को शामिल किया गया। इसमें गांव मुस्तफाबाद, शेरनगर, बिलासपुर और मुजफ्फरनगर ग्रामीण बाहर हदूद की भूमि शामिल की गई। इस विस्तार के बाद पालिका की आबादी 5 लाख से अधिक हो गई है। वर्तमान में ये आबादी करीब आठ लाख बताई जाती है। इस सीमा विस्तार के लिए शासन ने सितम्बर 2022 में आपत्तियों के निस्तारण के बाद सीमा विस्तार की अधिसूचना जारी की थी। निगम बनाने के लिए किसी भी पालिका की आबादी पांच लाख या इससे अधिक होनी चाहिए।
नवम्बर 2025 में मुजफ्फरनगर पालिका को प्रथम श्रेणी की पालिका का दर्जा
सबसे बड़ा भौगोलिक भाग रखने के साथ ही करीब आठ लाख की आबादी वाली मुजफ्फरनगर पालिका को उत्तर प्रदेश सरकार ने नवम्बर 2025 में प्रथम श्रेणी की पालिकाओं में शामिल किया। मुजफ्फरनगर नगरपालिका को यूपी की सबसे बड़ी चार पालिकाओं में शामिल किया गया। मुजफ्फरनगर के आलवा लोनी, मऊ और रामपुर को ये प्रथम श्रेणी का दर्जा मिला था। इसके बाद हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने मुजफ्फरनगर को उन 58 जिला मुख्यालय वाली निकायों में भी शामिल किया, जिनमा चयन नवयुग पालिका योजना में स्मार्ट सिटी बनाने के लिए किया गया है। इसके लिए पांच साल तक चयनित पालिकाओं को दस करोड़ रुपये से अधिक की राशि विशेष योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए प्रति वर्ष देने की योजना है।






