सिद्धार्थनगर, 3 मई 2026। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में रील बनाने का शौक बच्चों के लिए जानलेवा साबित हुआ। काशीराम आवास कॉलोनी में पांच बच्चे करीब 60 फीट ऊंची जर्जर पानी की टंकी पर चढ़ गए। नीचे उतरते समय टंकी की सीढ़ी टूट गई, जिससे तीन बच्चे नीचे गिर गए। हादसे में एक बालक की मौत हो गई, जबकि दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए।
इसी दौरान दो बच्चे टंकी के ऊपरी हिस्से पर ही फंस गए। करीब 16 घंटे तक चले राहत और बचाव अभियान के बाद रविवार सुबह भारतीय वायुसेना के MI-17 हेलिकॉप्टर की मदद से दोनों बच्चों को सुरक्षित नीचे उतारा गया। रेस्क्यू के बाद दोनों को उपचार और निगरानी के लिए गोरखपुर के एयरफोर्स अस्पताल ले जाया गया।
रील बनाने के लिए चढ़े थे पांच बच्चे
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर बच्चे काशीराम आवास कॉलोनी के पास बनी पुरानी पानी की टंकी पर चढ़े थे। बताया जा रहा है कि वे मोबाइल से रील बनाने के लिए ऊपर गए थे। कुछ देर बाद जब बच्चे नीचे उतरने लगे, तभी टंकी की जर्जर सीढ़ी अचानक टूट गई।
सीढ़ी टूटते ही तीन बच्चे नीचे आ गिरे। इनमें से एक बालक पर सीढ़ी का मलबा भी गिर गया। आसपास मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां एक बालक को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। दो घायल बच्चों का इलाज कराया जा रहा है।
दो बच्चे टंकी पर फंसे, रातभर चला बचाव अभियान
हादसे के बाद दो बच्चे टंकी पर ही फंस गए। वे नीचे उतरने की स्थिति में नहीं थे। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। बच्चों तक रस्सी के जरिए पानी और खाने की सामग्री पहुंचाई गई, ताकि वे रातभर सुरक्षित रह सकें।
प्रशासन ने पहले हाइड्रॉलिक क्रेन की मदद से रेस्क्यू की कोशिश की, लेकिन टंकी के आसपास दलदल होने के कारण क्रेन नजदीक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद टंकी तक पहुंचने के लिए अस्थायी रास्ता बनाने का काम शुरू किया गया। रात में बारिश शुरू होने से यह काम भी बाधित हो गया।
सुबह MI-17 हेलिकॉप्टर से बचाए गए बच्चे
हालात गंभीर होते देख प्रशासन ने वायुसेना की मदद मांगी। रविवार तड़के गोरखपुर से भारतीय वायुसेना का MI-17 हेलिकॉप्टर मौके पर पहुंचा। इसके बाद एयरफोर्स की टीम ने टंकी पर फंसे दोनों बच्चों को सावधानी से एयरलिफ्ट किया।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। प्रशासन और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करते हुए बचाव कार्य को पूरा कराया। दोनों बच्चों को सुरक्षित निकाले जाने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली।
जर्जर टंकी और सुरक्षा पर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा किया है। अगर टंकी जर्जर थी और उपयोग में नहीं थी, तो वहां बच्चों की पहुंच कैसे बनी रही? क्या ऐसी सार्वजनिक संरचनाओं के आसपास सुरक्षा घेरा, चेतावनी बोर्ड या प्रवेश रोकने की व्यवस्था थी?
स्थानीय स्तर पर अब यह सवाल उठ रहा है कि शहरों और कस्बों में मौजूद ऐसी पुरानी पानी की टंकियों, खाली इमारतों और जर्जर ढांचों की नियमित जांच क्यों नहीं होती। बच्चों के लिए ऐसे स्थान खतरनाक साबित हो सकते हैं, खासकर तब जब सोशल मीडिया पर रील बनाने की होड़ लगातार बढ़ रही है।






