नई दिल्ली। टी20 (T20) वर्ल्ड कप को लेकर भारत-बांग्लादेश से जुड़ा विवाद अब एक नए सियासी-क्रिकेटिंग मोड़ पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने बड़ा फैसला लेते हुए बांग्लादेश को ग्रुप-C से बाहर कर स्कॉटलैंड को शामिल कर लिया है। हालांकि यह निर्णय मतदान के जरिए लिया गया, लेकिन इसके बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) लगातार इस मुद्दे को फिर से हवा देने की कोशिश करता नजर आ रहा है।
आईसीसी की हालिया वोटिंग में बांग्लादेश के पक्ष में सिर्फ पाकिस्तान खड़ा दिखा, जबकि 14 सदस्य देशों ने फैसले के समर्थन में वोट दिया। इस तरह बांग्लादेश को भारी बहुमत से हार का सामना करना पड़ा।
वेन्यू विवाद में भी बांग्लादेश के साथ रहा पाकिस्तान
सूत्रों के मुताबिक, टूर्नामेंट के वेन्यू बदलने के मुद्दे पर भी पाकिस्तान ने बांग्लादेश का समर्थन किया था। हालांकि आईसीसी के भीतर इस दलील को ज्यादा तवज्जो नहीं मिली और बहुमत ने मौजूदा व्यवस्था के पक्ष में रुख अपनाया। इसके बावजूद, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड इस मसले को खत्म मानने के मूड में नहीं है।
“टी20 वर्ल्ड कप खेलेंगे या नहीं, सरकार तय करेगी” – PCB अध्यक्ष
लाहौर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष मोहसिन नक़वी ने बयान देकर विवाद को और गहरा कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि— “पाकिस्तान टी20 वर्ल्ड कप में खेलेगा या नहीं, इसका अंतिम फैसला सरकार करेगी।” नक़वी ने बताया कि प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ फिलहाल विदेश दौरे पर हैं, और उनके लौटने के बाद ही सरकार से सलाह लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी। “हम आईसीसी से ज्यादा अपनी सरकार के फैसले को मानते हैं। जो सरकार कहेगी, वही पीसीबी करेगा,” — मोहसिन नक़वी
बांग्लादेश के साथ ‘डबल स्टैंडर्ड’ का आरोप
पीसीबी प्रमुख ने बांग्लादेश के बाहर होने पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है। नक़वी के मुताबिक “बांग्लादेश एक बड़ा क्रिकेटिंग स्टेकहोल्डर है और उसे हर हाल में वर्ल्ड कप में खेलना चाहिए। उनके साथ दोहरा रवैया नहीं अपनाया जा सकता।” उन्होंने यह भी इशारा किया कि आईसीसी की वोटिंग प्रक्रिया के पीछे कई ऐसे पहलू हैं, जिन पर वह फिलहाल खुलकर बात नहीं करना चाहते। “इस फैसले के पीछे कई और बातें भी हैं, जिन पर सही समय आने पर विस्तार से बात की जाएगी।”
‘22वीं टीम’ वाला बयान और नया संकेत
नक़वी ने अपने बयान में यह भी कहा कि यदि पाकिस्तान सरकार टूर्नामेंट में खेलने को लेकर सहमति नहीं देती, तो “आईसीसी चाहे तो किसी और टीम को भी आमंत्रित कर सकती है।”
इस बयान को क्रिकेट हलकों में दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
आईसीसी के फैसले के बाद अब यह मामला सिर्फ बांग्लादेश तक सीमित नहीं रहा। पाकिस्तान की तीखी प्रतिक्रिया ने टूर्नामेंट से पहले ही राजनीति और क्रिकेट के टकराव को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विवाद लंबा खिंचता है, तो इसका असर टूर्नामेंट की छवि और तैयारियों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, आईसीसी अपने फैसले पर कायम है, लेकिन पाकिस्तान की अगली चाल और सरकारी रुख पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।






