77वें गणतंत्र दिवस पर पुरकाजी में हुआ विशाल ट्रैक्टर मार्च, शहीदों के सम्मान में सड़कों पर उतरा जनसैलाब
मुजफ्फरनगर। 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर पुरकाजी कस्बे में अमर शहीदों के सम्मान में नगर पंचायत के चेयरमैन जहीर फारूकी के नेतृत्व में सूली वाला बाग को शहीद स्मारक बनाने की मांग के लिए एक विशाल ट्रैक्टर तिरंगा मार्च निकाला गया। इसमें मुख्य अतिथि भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत रहे। इस मार्च में सैकड़ों ट्रैक्टर, ट्राली के साथ ही क्रेन, ड्रोन और बुलडोजर लेकर हजारों लोग, किसान, मजदूर और व्यापारी तिरंगे के साथ शामिल हुए। देशभक्तो के जनसैलाब के साथ ये मार्च बस स्टैंड से शुरू होकर सूली वाला बाग पर जाकर समाप्त हुआ, जहां एक विशेष सभा का आयोजन किया गया।

मार्च के दौरान किसान नेता राकेश टिकैत ने जिला प्रशासन से मांग की कि सूली वाला बाग को शहीद स्थल घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि इस बाग में अंग्रेजों ने मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और मेरठ के 500 स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी थी, और देश की आजादी के आंदोलन में एक बड़ी भूमिका तथा बलिदान के गवाह इस ऐतिहासिक स्थल को शहीद स्मारक के रूप में संरक्षित करना आवश्यक है। राकेश टिकैत ने मीडिया से बात करते हुए कहा, दिल्ली की परेड जितनी बड़ी है, उतनी ही बड़ी पुरकाजी की परेड भी है। शहीद स्मारक यहां बनना चाहिए और यहां पर स्वतंत्रता आंदोलन के बलिदान को सहेजने वाले उन पेड़ों को भी संरक्षित किया जाना चाहिए, जिन पर देशवासियों को अंग्रेज अफसरों द्वारा फांसी दी गई थी। इससे हमारे नौजवान देश के इतिहास को समझ सकेंगे और राष्ट्रवाद की भावना जागृत करने के लिए यह बाग एक प्रेरक स्थल भी बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश में कई ऐसे स्थल हैं, जहां स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी गई थी, और उन्हें संरक्षित कर युवाओं को इतिहास से जोड़ा जाना चाहिए। राकेश टिकैत ने कहा कि सूली वाला बाग का आंदोलन चेयरमैन जहीर फारूकी की दस साल की तपस्या है, जहीर ने ही अकेले खड़े होकर भुला दिए गए अमर शहीदों के इस बलिदान को जीवित किया और कुर्बानी के इस बडे इतिहास को खोजने का काम किया है। उनके इस संघर्ष को हम बेकार नहीं होने देंगे। जहीर फारूकी की यह मुहिम आज एक जन आंदोलन बन चुकी है और इस तिरंगा यात्रा में उमड़ा हजारों लोगों का यह सैलाब इस बात की गवाही दे रहा है।

जहीर फारूकी ने अपने संबोधन में कहा कि ये इस देश और क्षेत्र की बदकिस्मती है कि देश की आजादी के लिए अंग्रेज हुकुमत के जुल्म का शिकार हुए शहीदों को भी भुलाया जा रहा है। सूली वाला बाग का बलिदान जलियावाला बाग के कमतर नहीं है, लेकिन इसके लिए सरकार कोई भी सकारात्मक पहल नहीं कर रही है। देश की आजादी के बाद से जितनी भी सरकार आई सूली वाला बाग की शहादत को गंभीरता से नहीं लिया गया, हम आखिरी सांस तक इन शहीदों के सम्मान की लड़ाई लड़ते रहेंगे। इस दौरान केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार के नाम एडीएम फाइनेंस गजेन्द्र सिंह को राकेश टिकैत और जहीर फारूकी ने सूली वाला बाग को शहीद स्मारक बनाने की मांग का ज्ञापन सौंपा। एडीएम ने कहा कि उन्होंने भी अपनी विद्यालयी शिक्षा में एनसीईआरटी की किताबों में सूली वाला बाग के शहीदों के बारे में पढ़ा है। यह एक बड़ी कुर्बानी थी। वो भरोसा दिलाते हैं कि प्रशासन के स्तर से जो भी इसके लिए बन सकेगा वो किया जायेगा और इस ज्ञापन को उचित माध्यम से केन्द्र सरकार तक पहुंचाने का काम होगा।

इस तिरंगा यात्रा के दौरान पुरकाजी और आसपास के गांवों से हजारों लोग तिरंगा लेकर पहुंचे थे। इसमें सभी वर्गों के लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर जहीर फारूकी के आंदोलन को एक नई ताकत देने का काम किया। भीड़ के लिहाज से इस बार भी जहीर फारूकी ने नया रिकॉर्ड कायम किया। वैश्य समाज के लोगों की ओर से तिरंगा यात्रा पर अलग अलग स्थानों पर पांच ड्रोन से पुष्प वर्षा की गई। खादर तिराहे पर क्रेन से फूलों की बारिश हुई। इसके अलावा व्यापारियों और समाज के अन्य लोगों ने पुष्व वर्षा की और मिष्ठान वितरित किया गया।
बता दें कि जहीर फारूकी एडवोकेट द्वारा पुरकाजी का ऐतिहासिक महत्व वाला और सैंकड़ों सेनानियों के बलिदान का इतिहास समेटकर रखने वाला सूली वाला बाग को बदहाली से निकालकर इसके लिए एक आंदोलन खड़ा किया। जहीर फारूकी पहली बार 2016 को सूली वाला बाग के अमर शहीदों के सम्मान में आवाज उठाने के लिए सड़कों पर उतरे और लोगों को जोड़ने का काम किया था। इस बाग को अंग्रेजों के अत्याचार और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की याद दिलाने वाला स्थल माना जाता है। जहीर फारूकी का कहना है कि ऐसे स्थलों को संरक्षित करके युवाओं में देशभक्ति और इतिहास की समझ पैदा की जा सकती है। इस एक दशक में जहीर ने इस मुहिम को घर घर तक पहुंचाने में सफलता अर्जित की है।
तिरंगा यात्रा में छाया सूली वाला बाग पर बनवाया गया देशभक्ति गीत
मुजफ्फरनगर। चेयरमैन ज़हीर फारुकी ने इस बार सूली वाला बाग़ के आंदोलन को हर घर तक पहुंचाने और लोगों की जुबां पर इन शहीदों के बलिदान को नई ताजगी देने के लिए शहादत के इस इतिहास पर एक देशभक्ति गीत भी बनवाया, जो इस तिरंगा यात्रा के दौरान पूरी तरह से छाया रहा।
इस गीत को मुंबई के उबेद आज़मी ने लिखा है तथा इसके संगीतकार मुंबई के हुमायूं कबीर हैं। गायक मुंबई के रहमान अली ने इस गीत को अपनी आवाज दी है तथा इसके प्रोड्यूसर खुद चेयरमैन ज़हीर फारुकी हैं। सूली वाला बाग़ पर बने स्टेज से मुंबई के गायक रहमान अली ने पुरकाजी की जनता को अपने देशभक्ति के गीतों से दिल जीत लिया। रहमान अली ने सूली वाला बाग़ पर बने इस देशभक्ति गीत को भी सुनाया। जिस पर पुरकाजी की जनता ने भी रहमान अली के साथ गीत गाकर भरपूर साथ दिया।






