वैष्णो देवी हादसाः कार्तिक का शव देख बिलख पड़े परिजन

दो दिन बाद घर पहुंचा शव, मोहल्ले में छाया मातम, गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार, भूस्खलन की चपेट में घायल माता-पिता व बहनें, कई और परिवार भी हुए हादसे का शिकार

मुजफ्फरनगर। वैष्णो देवी यात्रा पर गए श्रद्धालुओं का उत्साह एक दर्दनाक हादसे के कारण मातम में बदल गया है। कश्मीर में हुए भूस्खलन हादसे में 22 वर्षीय कार्तिक की मौत के साथ ही शहर के कई परिवारों के चिराग बुझने से मुजफ्फरनगर गहरे सदमे में है। इस हादसे में अब तक जनपद के शहर के दो मौहल्लों के चार परिवारों से छह लोगों की मौत होने की खबर है। देर रात कार्तिक का शव जैसे ही उनके पैतृक गांव के घर पहुंचा, परिवार के लोगों में कोहराम मच गया और पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई। कार्तिक का अंतिम दर्शन करने के लिए मौहल्ले के लोगों की भी भीड़ रही। शाम के समय कार्तिक का अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं रामपुरी में चार परिवारों के 23 लोगों में पांच की मौत होने के कारण उनके परिजनों में गम और गुस्सा बना हुआ है। उन्होंने प्रदर्शन करते हुए नेताओं और अधिकारियों की अनदेखी के कारण आक्रोश जताया।

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वैष्णो देवी यात्रा से लौटते वक्त हुए भूस्खलन हादसे ने मुजफ्फरनगर शहर को गहरे शोक में डुबो दिया। आबकारी मोहल्ला निवासी सिविल इंजीनियर मिंटू कश्यप के 22 वर्षीय इकलौते पुत्र कार्तिक की मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। पिता, माता और दो बहनें गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज जारी है। कार्तिक का शव हादसे के करीब दो दिन बाद देर रात उनके पैतृक गांव अलीपुर खुर्द ले जाया गया था, यहां रामलीला टिल्ला पर भी लोग गमगीन नजर आये। शव गांव में उनके आवास पर पहुंचा तो कोहराम मच गया। अंतिम संस्कार श्मशान घाट पर किया गया, जहां हजारों लोगों ने नम आंखों से विदाई दी।
24 अगस्त को मिंटू कश्यप अपनी पत्नी संगीता देवी, पुत्र कार्तिक, बेटी उमंग और भांजी वैष्णवी संग वैष्णो देवी यात्रा पर गए थे। 26 अगस्त को दर्शन कर लौटते वक्त अचानक भूस्खलन की चपेट में आने से कार्तिक की मौके पर ही मौत हो गई। परिवार के अन्य सदस्य गंभीर घायल हुए, जिनका इलाज जम्मू-कश्मीर में चल रहा है। हादसे ने केवल एक परिवार ही नहीं, बल्कि मुजफ्फरनगर के कई घरों को गहरे शोक में डाल दिया है। शहर के दक्षिणी रामपुरी शाहबुद्दीनपुर रोड निवासी प्रजापति समाज के 23 श्रद्धालुओं का दल भी 25 अगस्त को धर्मवीर के नेतृत्व में यात्रा पर गया था। इस दल में 12 बच्चे शामिल थे।
इसमें से पांच लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। अजय प्रजापति के बेटे अनंत (9) और दीपेश (8) की मौत हो गई, जबकि बेटी पूर्वी और अजय गंभीर घायल हैं। इसी दल में शामिल रामबीरी (49) पत्नी इंद्रपाल, पुत्री अंजली (22) और ममता (48) पत्नी रविन्द्र सिंह की भी मौत की खबर ने परिजनों को तोड़ दिया है। हादसे के बाद से परिजनों की बेचौनी और चिंता और बढ़ गई है। 27 अगस्त की रात 11 बजे मौत की सूचना परिजनों तक पहुंची, जिसके बाद 28 अगस्त को कई रिश्तेदार शव लेने जम्मू-कश्मीर रवाना हुए, लेकिन भारी बारिश और बंद रास्तों के चलते वे पठानकोट से आगे नहीं बढ़ पाए। जम्मू में मोबाइल नेटवर्क ठप होने से परिजनों की कोई बातचीत भी नहीं हो पा रही है।

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