आगरा में मीटर उखाड़ने पर एफआईआर को लेकर जताया गुस्सा, 11 मई को गांव पहुंचेंगे टिकैत
मुजफ्फरनगर। देश में बिजली व्यवस्था के आधुनिकीकरण के तहत लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर अब बड़े विवाद का कारण बनते जा रहे हैं। कई राज्यों के साथ ही उत्तर प्रदेश में इसके खिलाफ जनता और किसानों का विरोध तेज हो रहा है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने इस मुद्दे को जनभावनाओं से जुड़ा बताते हुए सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म स्मार्ट मीटर योजना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में लोग इस योजना का विरोध कर रहे हैं। टिकैत के मुताबिक आगरा में विरोध इतना बढ़ गया कि लोगों ने अपने घरों से स्मार्ट मीटर उखाड़कर सड़कों पर फेंक दिए। इतना ही नहीं, कुछ स्थानों पर इन मीटरों को बिजली विभाग के कार्यालयों और अधिकारियों के आवास तक ले जाकर विरोध जताया गया। उन्होंने इसे जनता के बढ़ते गुस्से का स्पष्ट संकेत बताया।
राकेश टिकैत ने कहा कि जब आम लोग इस योजना को स्वीकार नहीं कर रहे, तो सरकार को इसे जबरन लागू नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि इस तरह के फैसलों से जनाक्रोश और बढ़ेगा, जिससे व्यापक आंदोलन की स्थिति बन सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार इस योजना को जरूरी मानती है, तो इसे आगामी 2027 चुनाव के घोषणा पत्र में शामिल कर जनता से समर्थन लिया जाए। टिकैत ने 1986 के करमूखेड़ी बिजलीघर आंदोलन को याद करते हुए कहा कि उस समय भी बिजली से जुड़े मुद्दों पर बड़ा जनआंदोलन खड़ा हुआ था। उनका कहना है कि वर्तमान हालात उसी तरह के विरोध की ओर बढ़ रहे हैं।
किसान नेता ने घोषणा की कि वह 11 मई को आगरा के उस गांव अकौला का दौरा करेंगे, जहां स्मार्ट मीटर उखाड़ने के मामले में ग्रामीणों पर एफआईआर दर्ज हुई है। उन्होंने कहा कि गांव में आयोजित पंचायत में शामिल होकर आगे की रणनीति तय की जाएगी और विरोध को संगठित किया जाएगा। बता दें कि आगरा की तहसील सदर के अंतर्गत ग्राम अकोला में शुक्रवार, 1 मई 2026 को स्मार्ट मीटर के विरोध में भारतीय किसान यूनियन जिलाध्यक्ष राजवीर लवानिया के नेतृत्व में ग्रामीणों ने स्मार्ट मीटर व्यवस्था के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया और घरों से स्मार्ट मीटरों को उखाड़कर बिजलीघर पर फेंक दिया गया था। इसमें उपभोक्ताओं पर एफआईआर की गई है। इसी का भाकियू विरोध कर रही है।
खाद संकट पर भी नाराजगी, कहा-नैनो पर जबरदस्ती बर्दाश्त नहीं
राकेश टिकैत ने किसानों के सामने खाद की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यूरिया और डीएपी खाद की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है, जबकि नैनो और अन्य तरल उत्पाद किसानों को जबरन दिए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि ये उत्पाद खेतों में अपेक्षित परिणाम नहीं दे रहे और कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए इन्हें बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि किसी भी दबाव में ऐसे उत्पाद न लें और जरूरत पड़े तो विरोध दर्ज कराएं। मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुए क्रूज हादसे का जिक्र करते हुए टिकैत ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हादसे में इस्तेमाल की गई सेफ्टी जैकेट पर गंभीर संदेह है और उनकी गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस घटना ने कई परिवारों को गहरा आघात पहुंचाया है और सरकार को इससे सबक लेते हुए सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करना चाहिए। टिकैत ने स्पष्ट किया कि स्मार्ट मीटर और खाद जैसे मुद्दों पर किसान संगठन गंभीर हैं। उन्होंने संकेत दिए कि यदि सरकार ने इन समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो आने वाले समय में व्यापक आंदोलन देखने को मिल सकते हैं।






