26 जनवरी से इलाहाबाद में शुरू हो रहे किसान चिंतन शिविर में यूनियन लेगी बड़ा निर्णय, कहा-अपराधियों के साथ खड़ा प्रशासन
मुजफ्फरनगर। पुलिस द्वारा भाकियू अराजनैतिक के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर मुकदमा दर्ज किये जाने को लेकर राष्ट्रीय प्रवक्ता रंगदार धर्मेन्द्र मलिक ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे पुलिस प्रशासन की गुंडागर्दी बताते हुए संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया है।
उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि पुलिस और प्रशासन अपराध करने वालों के साथ खड़ा है। उनको आरडीएफ के नाम पर कचरा जलाने के कारण हो रहा एक साइलेंट अपराध दिखाई नहीं दे रहा है। कूड़ा जलाकर जनपद की हवा पानी खराब कर रहे लोगों के खिलाफ ये लड़ाई कठिन हो सकती है, लेकिन इसको छोड़ेंगे। उन्होंने मुकदमे को जनता की आवाज दबाने का प्रयास बताते हुए कहा कि जनता के हितों के लिए जेल जाना पड़ा तो ये हमारा सौभाग्य होगा। कचरा माफियाओं से गठजोड़ करने वाले उद्योगपतियों के खिलाफ लड़ाई से हम नहीं डिगेंगे।
पुलिस प्रशासन न्यायकारी नीति पर चलता है, तो जिले के अफसर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, जल प्रदूषण अधिनियम और वायु प्रदूषण अधिनियम पर अमल करते हुए ऐेसे लोगों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की हिम्मत दिखाये। उन्होंने नेताओं पर मुकदमे को लेकर कड़ी नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी कि प्रशासन को हम समय पर इसका जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि 26 से 28 जनवरी तक इलाहाबाद में किसान चिंतन शिविर होगा। पश्चिमी उत्तर के मुद्दों को लेकर इसमे बड़ा निर्णय लिया जायेगा। कार्यकर्ता का सम्मान सर्वापरि है किसी भी रूप में ऐसे प्रशासन के सामने हम समझौता नहीं करेंगे, जो हवा, पानी और जीवन बर्बाद करने वाले पूंजीपतियों के हाथों की कठपुतली बनकर एक आम किसान को मुकदमों से डराने का काम कर रहा है।
सात घंटे भाकियू-अ के कब्जे में रहा एसएसपी ऑफिस, ड्रोन से कराई वीडियो ग्राफी
मुजफ्फरनगर। भाकियू अराजनैतिक के प्रदर्शन के दौरान करीब सात घंटे तक एसएसपी कार्यालय यूनियन कार्यकर्ताओं के कब्जे में रहा। इस दौरान पूरी व्यवस्था प्रभावित रही। सिविल लाइन के थानेदार आशुतोष कुमार की तहरीर के अनुसार इस प्रदर्शन में हंगामे और प्रदर्शन के दौरान स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली, मंडी और खालापार थानों की फोर्स, क्यूआरटी और अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर बुलाया गया। पूरे धरना-प्रदर्शन की कैमरों और ड्रोन से वीडियोग्राफी कराई गई। पुलिस का आरोप है कि सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक किसी भी फरियादी को पुलिस कार्यालय में पेश नहीं होने दिया गया, जिससे प्रशासनिक कार्य पूरी तरह बाधित रहा। उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद शाम करीब 6 बजे प्रदर्शनकारी अपने कार्यकर्ताओं और वाहनों के साथ वहां से चले गए, तब जाकर शहर की स्थिति सामान्य हो सकी।






