भ्रष्टाचार के आरोपों से नाराज़ ग्रामीणों का अल्टीमेटम,कृआवास बनने तक तहसील परिसर में ही करेंगे अस्थाई निवास
मुजफ्फरनगर। पिछले महीनों की भारी बारिश ने काफी संख्या में ग्रामीणों को बेघर कर दिया था। सरकारी राहत और आवास योजनाओं की उम्मीद में बैठे इन परिवारों को आज तक नया आशियाना नसीब नहीं हो सका। आरोप है कि तहसील कर्मियों द्वारा मनमानी, भ्रष्टाचार और गलत रिपोर्टिंग के चलते प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता नहीं मिल पा रही है। अब भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता विकास शर्मा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने अपना आशियाना पाने के लिए बड़ा आंदोलन छेड़ने का निर्णय ले लिया है।
इस बार जनपद में हुई भीषण बरसात में चरथावल इलाके के अनेक गांवों में गरीब ग्रामीणों के मकान ढह गए थे, जिससे दर्जनों परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए। इसमें कुछ लोग घायल हुए तो मौत भी हुई थी। सरकारी योजनाओं के अंतर्गत इन्हें जल्द आवास मिलना था, मगर ग्रामीणों का आरोप है कि तहसील कर्मचारियों ने सुविधा शुल्क न मिलने पर उनके मामलों में अपर्याप्त धनराशि की रिपोर्ट भेज दी। इससे प्रभावित परिवारों को मंज़ूर होने वाली सहायता अटक गई।
भारतीय किसान यूनियन के वरिष्ठ नेता विकास शर्मा ने बताया कि शिकायत अधिकारियों तक पहुँचाई गई थी। इसके बाद टीम फिर से जाँच के लिए पहुँची, लेकिन स्थानीय कर्मचारियों ने ग़लत जानकारी देकर दोबारा वही अपूर्ण रिपोर्ट भेज दी। इससे ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर है। भाकियू नेता विकास शर्मा ने साफ कहाकृकि जब तक गिरे हुए ग्रामीणों के आवास नहीं बनेंगे, तब तक उनका अस्थाई निवास तहसील परिसर ही होगा। बरसात में जिनके घर गिरे और आज तक नहीं बने, हम उन सभी परिवारों का सामान व पशु ट्रैक्टर-ट्रॉली में लादकर 12 दिसम्बर को तहसील परिसर में धरने पर बैठेंगे।
उन्होंने तहसील कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का सीधा आरोप लगाया और कहा कि अब आंदोलन वापस नहीं होगा। अगर तहसील में बैठकर ही ग्रामीणों को रहना पड़े, तो हम पीछे नहीं हटेंगे। जब तक रिपोर्ट सही नहीं बनती और सभी प्रभावित परिवारों को आवास स्वीकृत नहीं होते, आंदोलन तेज़ होता रहेगा। भाकियू के इस ऐलान के बाद प्रशासन में हलचल मच गई है। तहसील परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने और वार्ता के प्रयासों की खबरें भी सामने आ रही हैं, हालांकि ग्रामीणों का रुख फिलहाल बेहद कड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि 12 तारीख तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो तहसील परिसर में अस्थाई झोपड़ियाँ डालकर वहीं रहना शुरू कर देंगे। इस संभावित व्यापक विरोध प्रदर्शन से प्रशासनिक तंत्र की परीक्षा होना तय है।






