हाईवोल्टेज प्रदर्शन से पुलिस प्रशासन में हड़कम्प, भूमि घोटाले की जांच और मिलों में जल रहे कूड़ा-कचरे पर रोक की मांग
मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर में न्यू मैक्स सिटी टाउनशिप परियोजना को लेकर उठ रहे सवाल अब सड़क से निकलकर आसमान तक पहुंच गए हैं। पहले समाजसेवी विकास बालियान द्वारा मामले को उजागर किए जाने के बाद अब एक युवा सामाजिक कार्यकर्ता ने रेलवे स्टेशन स्थित टावर पर चढ़कर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। यह प्रदर्शन जिले में बढ़ते प्रदूषण और न्यू मैक्स सिटी भूमि प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर किया जा रहा है, जिसने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

न्यू मैक्स सिटी टाउनशिप परियोजना लगातार चर्चाओं का विषय बनी हुई है। इसी कड़ी में गुरुवार को सामाजिक कार्यकर्ता अजय शर्मा ने नई मंडी क्षेत्र स्थित रेलवे स्टेशन के टावर पर चढ़कर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनका कहना है कि जब तक जिले की मिलों में जल रहे कूड़ा-कचरे पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जाती और न्यू मैक्स सिटी भूमि प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच नहीं होती, तब तक वह टावर से नीचे नहीं उतरेंगे।

अजय शर्मा द्वारा टावर पर चढ़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ तो पुलिस प्रशासन में भी हड़कम्प मच गया। नई मंडी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर टावर पर चढ़कर धरना देकर बैठे युवक अजय को समझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन घंटों तक युवक वहीं पर अड़ा रहा। वायरल हो रही वीडियो में वह मिलों से निकलने वाले धुएं, कूड़ा-कचरा जलाने से फैल रहे प्रदूषण और इसके कारण आम जनता के स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभावों का जिक्र करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। इसके साथ ही उसने न्यू मैक्स सिटी को भी एक बड़ा घोटाला और धांधली बताते हुए कहा कि इसमें निवेशकों का पैसा भी डूबा हुआ है, सेबी में बंधक भूमि बेच दी गई। इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
गौरतलब है कि इससे पहले समाजसेवी विकास बालियान ने दिल्लीदृदेहरादून हाईवे पर विकसित हो रही न्यू मैक्स सिटी परियोजना को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने जिलाधिकारी को शिकायत पत्र सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी। विकास बालियान के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद न्यू मैक्स सिटी से जुड़ी 212.51 एकड़ भूमि सेबी के पास गिरवी रखी गई थी, जिसका वर्ष 2013 में मूल्यांकन लगभग 307 करोड़ रुपये किया गया था। आरोप है कि इसी भूमि को वर्ष 2022 से 2024 के बीच आनंद सिंह बिष्ट नामक व्यक्ति द्वारा ऑथराइज्ड सिग्नेटरी बनकर करीब 95 करोड़ रुपये में विभिन्न कंपनियों और व्यक्तियों को बेच दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सेबी यह स्पष्ट कर चुका है कि भूमि से संबंधित मूल दस्तावेज उसके पास सुरक्षित हैं, तो फिर किस आधार पर रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी की गई? सेबी की अनुमति के बिना भूमि की बिक्री, ट्रांसफर और रजिस्ट्री कैसे संभव हुई? इसके साथ ही उन्होंने यह भी सवाल किया कि जिस परियोजना का नक्शा वर्ष 2025 में स्वीकृत हुआ, उसकी प्लॉट बिक्री वर्ष 2024 में कैसे शुरू कर दी गई।
विकास बालियान ने जिलाधिकारी को वर्ष 2024 की बैंक रसीदें भी सौंपी हैं, जो न्यू मैक्स द एड्रेस प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित बताई जा रही हैं। उनका दावा है कि भूमि बिक्री से प्राप्त धनराशि सेबी-सहारा खाते में जमा नहीं की गई, जबकि यह राशि निवेशकों की थी और उसी से रिफंड संभव होना था। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्लीदृहरिद्वार हाईवे की प्रीमियम लोकेशन पर स्थित भूमि, जिसकी बाजार कीमत 50 लाख से 1 करोड़ रुपये प्रति बीघा तक बताई जाती है, उसे मात्र 5 लाख रुपये प्रति बीघा के हिसाब से कैसे बेचा गया, यह अपने आप में गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब इस पूरे प्रकरण को लेकर आम नागरिक, सामाजिक संगठन और पर्यावरण से जुड़े कार्यकर्ता भी खुलकर सामने आने लगे हैं। टावर पर चढ़कर किया गया यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज हो सकता है। फिलहाल प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है, लेकिन जनता को अब ठोस कार्रवाई का इंतजार है।





