क्यूआर कोड स्कैन कर देखे जा सकेंगे भ्रष्टाचार के सबूत, लेखक ने अपनी आपबीती के जरिए सिस्टम की पोल खोलने का किया दावा
मुजफ्फरनगर। भ्रष्टाचार और नौकरशाही की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती पुस्तक ‘अफसर शाही ;एक अनसुना सचद्ध’ चर्चा का विषय बनी हुई है। इस पुस्तक में लेखक ने अपने साथ घटित घटनाक्रमों और आपबीती का उल्लेख करते हुए दावा किया है कि इसमें दिए गए तथ्यों के साथ पक्के प्रमाण भी मौजूद हैं। पाठक पुस्तक में दिए गए क्यूआर कोड ;फत् ब्वकमद्ध को स्कैन करके समस्त प्रमाण और सबूतों को देख सकते हैं और उन्हें डाउनलोड करके उनका प्रिंटआउट भी निकाल सकते हैं।
पुस्तक के माध्यम से देश में अफसरशाही की उस तस्वीर को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों ;आईएएस और पीसीएसद्ध पर माफियाओं और अपराधियों से सांठगांठ के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। लेखक ने दावा किया है कि सरकारी संपत्ति का बंदरबांट करने के लिए एक ‘ड्डत्रिम महाभूमि घोटाला’ रचा गया। इसकी आड़ में अरबों रुपये की किसानों की गन्ने की फसल को लूटा गया। लेखक का आरोप है कि विरोध करने पर उन सहित सैकड़ों किसानों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराए गए, फर्जी सबूत बनाए गए और शासन-प्रशासन को गुमराह किया गया। इस पुस्तक में यह दर्शाया गया है कि वर्तमान समय में किसी सरकारी कर्मचारी के लिए ईमानदारी से कार्य करना कितना कठिन हो गया है। लेखक ने बताया कि यदि कोई कर्मचारी अपने कर्तव्य पथ से विचलित नहीं होता, तो अधिकारी उसे फर्जी तरीके से फंसाते हैं। उसे महाभ्रष्टाचारी, गैंगस्टर, हिस्ट्रीशीटर और भूमाफिया घोषित कर बदनाम किया जाता है, ताकि उसे सरकारी सेवा से बाहर का रास्ता दिखाया जा सके। लेखक के अनुसार, उनका एकमात्र दोष यह था कि उन्होंने इन अधिकारियों के अपराधों को सार्वजनिक किया। पुस्तक में प्रजातंत्र और संविधान के शासन के विपरीत अधिकारियों की तानाशाही का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि अधिकारी ही नियम और कानून बन गए हैं, जिन्हें सही-गलत देखने वाला कोई नहीं है। लेखक ने लिखा है कि देश में किसानों के हित की बात तो सब करते हैं, लेकिन जब उनकी जमीन और फसल लूटी जाती है, तो उन्हें न्याय दिलाने के लिए कोई आगे नहीं आता। लेखक ने बताया कि यह पुस्तक हताश और निराश लोगों के लिए संजीवनी का कार्य करेगी और उन्हें विपरीत परिस्थितियों में हार न मानने की प्रेरणा देगी। इस पुस्तक को प्रार्थना पत्र के साथ संलग्न करके राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, अध्यक्ष राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय इलाहाबाद, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ, प्रमुख सचिव ;कार्मिकद्ध भारत सरकार, निदेशक प्रवर्तन ;ईडीद्ध, केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और निदेशक केंद्रीय जांच ब्यूरो ;सीबीआईद्ध को भेजा गया है।






