श्रीमद भागवत कथा का शुभारंभ, भव्य कलश यात्रा के साथ गूंजा शहर

कथावाचक हिमेश शास्त्री ने सुनाया श्रीमद भागवत महात्म्य, राजा परीक्षित के श्राप और शुकदेव जी आगमन का प्रसंग

मुजफ्फरनगर। कथावाचक हिमेश शास्त्री जी महाराज (मथुरा वाले) के सान्निध्य में बृहस्पतिवार को शहर के सनातन धर्म सभा भवन में श्रीमद भागवत कथा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। सवेरे बाग केशोदास स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर परिसर से बैंडबाजों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में निकली कलश यात्रा टाउनहाल रोड होते हुए शिव चौक पहुंची, जहां भगवान शिव की पूजा-अर्चना के बाद यात्रा कथा स्थल श्री सनातन धर्म सभा भवन पहुंचकर संपन्न हुई। कथा के प्रथम दिन श्रीमद भागवत महात्म्य, राजा परीक्षित को श्राप तथा शुकदेव जी के आगमन का प्रसंग सुनाया गया।

सनातन धर्म सभा भवन में समस्त अग्रवाल परिवार के द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। कथावाचक हिमेश शास्त्री जी महाराज के सानिध्य में सैंकड़ों श्रद्धालुओं के द्वारा निकाली गई इस कलश यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय माहौल से भर दिया। कलश यात्रा में मुख्य कलश अग्रवाल परिवार द्वारा धारण किया गया, जबकि अभिनव अग्रवाल ने श्रीमद भागवत को सिर पर धारण किया। कथावाचक हिमेश शास्त्री जी महाराज ने विधिवत कलश स्थापना कराई।

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अपराह्न तीन बजे श्रीमद भागवत पूजन के बाद कथा का शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिन श्रीमद भागवत महात्म्य, राजा परीक्षित को श्राप तथा शुकदेव जी के आगमन का प्रसंग सुनाया गया। कथा के दौरान हिमेश शास्त्री महाराज ने कहा कि जिस मनुष्य ने भागवत रूपी अमृत का पान कर लिया, उसका मानव जीवन सफल हो जाता है। भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य मन, मोह, लोभ, काम और अहंकार पर विजय प्राप्त कर सकता है। उन्होंने गुरु के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिसे सद्गुरु की प्राप्ति हो जाती है, उसका परलोक सुधर जाता है। महात्म्य की कथा में उन्होंने बताया कि सत्संग के बिना मनुष्य की गति संभव नहीं है। ज्ञान, वैराग्य और भक्ति के माध्यम से ही जीवन के संकटों का समाधान संभव है।

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हिमेश शास्त्री महाराज ने कहा कि श्रीमद भागवत केवल एक ग्रंथ या इतिहास नहीं, बल्कि साक्षात मुरली मनोहर श्रीकृष्ण का स्वरूप है। श्रीमद भागवत और श्रीकृष्ण में कोई भेद नहीं है, ये एक ही हैं। उन्होंने भक्त प्रह्लाद और भगवान नरसिंह के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भक्त की वाणी को सत्य करने के लिए स्वयं श्रीहरि नरहरि बनकर धरती पर अवतरित हुए और दुष्ट हिरण्यकश्यपु का संहार कर भक्त प्रह्लाद की रक्षा की। अभिनव अग्रवाल ने बताया कि 18 मार्च तक सनातन धर्म सभा भवन में अपराहन 3 बजे से 7 बजे तक कथा होगी।

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कथा के दौरान मुख्य रूप से राकेश बिन्दल, दीप अग्रवाल, शोभित गुप्ता, परमात्मा शरण अग्रवाल, प्रदीप गर्ग, किशन अग्रवाल, पीयूष अग्रवाल, अभिनव अग्रवाल, अभिनव गर्ग, कार्तिक अग्रवाल, दीपक गोयल, योगेश माहेश्वरी, अमित गर्ग, ममता अग्रवाल, श्रुति अग्रवाल, आंचल अग्रवाल, अमिता अग्रवाल, पूजा अग्रवाल और रचना अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्तिमय वातावरण में धार्मिक भजनों पर ­ाूमते हुए कथा का श्रवण किया।

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