पूर्व विधायक सहित चार स्थानों पर ईडी की छापेमारी से मुजफ्फरनगर में मचा हड़कंप

रालोद नेता नूर सलीम उर्फ पप्पू राणा समेत कई प्रमुख कारोबारियों के ठिकानों पर पहुंची टीमें, पैरा मिलिट्री फोर्स रही तैनात

मुजफ्फरनगर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी से सोमवार सुबह मुजफ्फरनगर में हड़कंप मच गया। ईडी की अलग-अलग टीमों ने जनपद में एक साथ कई स्थानों पर कार्रवाई की। बताया जा रहा है कि टीमों ने रालोद नेता एवं पूर्व विधायक नूर सलीम उर्फ पप्पू राणा के मेरठ रोड स्थित राणा हाउस, पूर्व चेयरमेन अनिल तायल के नई मंडी और द्वारकापुरी स्थित आवास तथा पारस जैन टीएमटी सरिया मिल के मालिक संजय जैन के आवास पर छापेमारी की।

जानकारी के अनुसार, ईडी के अधिकारी सोमवार तड़के करीब पांच बजे दर्जनों वाहनों में सवार होकर अलग-अलग ठिकानों पर पहुंचे। टीमों के साथ पैरा मिलिट्री फोर्स के जवान भी मौजूद रहे। अचानक हुई इस कार्रवाई की खबर फैलते ही शहर के प्रमुख उद्योगपतियों और व्यापारियों में खलबली मच गई।

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छापेमारी को लेकर यह भी चर्चा रही कि ईडी के कुछ अधिकारी शिवभक्त कांवड़ियों के वेश में पहुंचे थे। कार्रवाई में शामिल वाहनों पर ‘बम-बम भोले’ के स्टीकर लगे दिखाई दिए। हालांकि, अधिकारियों की ओर से इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

ईडी की टीमें संबंधित परिसरों में दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच में जुटी रहीं। छापेमारी किस मामले और किन आरोपों से संबंधित है, इसे लेकर आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी का इंतजार है। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और संबंधित परिसरों के आसपास लोगों की आवाजाही पर भी नजर रखी गई।

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फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लेने और उसे आगे पास करने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार तड़के बड़ी कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के अनुसार, प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और फरीदाबाद में कुल नौ ठिकानों पर तलाशी ली जा रही है। ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय की टीम ने जम्बूद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स लिमिटेड से जुड़े मामले में यह कार्रवाई की है। अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित इकाई पर बिना माल की वास्तविक आवाजाही के फर्जी चालान और ई-वे बिल तैयार कर फर्जी आईटीसी बनाने और उसे आगे पास करने का आरोप है।

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जांच में कई फर्जी और कागजी कंपनियों के जरिये बड़े पैमाने पर सर्कुलर ट्रांजेक्शन, फंड की तेजी से लेयरिंग और नकदी निकासी का पता चला है। अधिकारियों के मुताबिक, जीएसटी अधिकारियों की जांच में 9.63 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) कथित तौर पर गलत तरीके से हासिल करने और 10.28 करोड़ रुपये का आईटीसी आगे पास करने की बात सामने आई है।

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