नोएडा इंजीनियर मौत मामला: CM योगी सख्त, CEO हटाए गए, SIT से होगी पूरे प्रकरण की जांच

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में हुआ यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की लापरवाही में बुझी एक युवा ज़िंदगी की कहानी बन गया है। पानी में डूबी कार के साथ सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने न केवल उनके परिवार को तोड़ दिया, बल्कि पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया।

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इस घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा संज्ञान लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी कीमत पर लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है, जिसे महज पांच दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।

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हादसे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री ने नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम को तत्काल पद से हटा दिया। यह फैसला केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि उन सवालों का जवाब माना जा रहा है जो एक बेटे, एक पति और एक युवा पेशेवर की मौत के बाद उठ रहे हैं।

एसआईटी की अगुवाई एडीजी जोन मेरठ करेंगे। टीम में मेरठ मंडलायुक्त और लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को भी शामिल किया गया है। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि जलभराव जैसी स्थिति में सुरक्षा इंतजाम क्यों नाकाफी रहे, चेतावनी संकेत क्यों नहीं लगाए गए और समय रहते मदद क्यों नहीं पहुंच सकी।

बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त सेक्टर-150 में सड़कें पानी से लबालब थीं। युवराज की कार एक गहरे जलभराव वाले अंडरपास में फंस गई। बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था और मदद पहुंचने से पहले ही सब कुछ खत्म हो गया। यह सोचकर ही रूह कांप उठती है कि कोई व्यक्ति अपनी कार में बैठा जिंदगी के लिए संघर्ष करता रहा और आसपास की व्यवस्था खामोश बनी रही।

सोमवार को आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस दर्द को और गहरा कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक युवराज के फेफड़ों में करीब साढ़े तीन लीटर पानी भरा हुआ था, जिससे साफ है कि वह लंबे समय तक पानी में जिंदा रहने की कोशिश करते रहे। सांस रुकने से दम घुटा और शरीर पर अत्यधिक दबाव के कारण दिल ने भी साथ छोड़ दिया।

युवराज की मौत अब सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है। यह घटना उन खतरों की याद दिलाती है, जो लापरवाही, अधूरी प्लानिंग और कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते हर मानसून में आम लोगों की जान पर भारी पड़ जाते हैं। अब सवाल यह नहीं है कि गलती किसकी थी, बल्कि यह है कि क्या इस मौत से कोई सबक लिया जाएगा—या फिर अगली बारिश किसी और घर का चिराग बुझा देगी।

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