लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार और चुनाव आयोग पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा हालात में सत्ता और संस्थानों की भूमिका को लेकर गंभीर आशंकाएं पैदा हो रही हैं।
अखिलेश यादव ने शंकराचार्य प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास और धर्म में ‘कालनेमी’ जैसे पात्रों की चर्चा होती रही है और आज के दौर में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि “कलयुग के कालनेमी कौन हैं?” उन्होंने कहा कि ऐसे विवाद समाज में भ्रम और तनाव पैदा करते हैं, जिनसे बचना चाहिए।
SIR के तहत मतदाताओं को जारी किए जा रहे नोटिसों को लेकर अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं को नोटिस भेजे जा रहे हैं, उसकी स्पष्ट जानकारी राजनीतिक दलों को नहीं दी जा रही है। अखिलेश का आरोप है कि इससे पारदर्शिता पर असर पड़ता है और यह संदेह पैदा होता है कि प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष है या नहीं।
उन्होंने यह भी कहा कि उपचुनावों के दौरान सामने आई शिकायतों से यह भरोसा कमजोर हुआ है कि मतदाता सूची में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होगी। उनका कहना था कि चुनाव आयोग ने पहले यह भरोसा दिलाया था कि SIR के बाद मतदाता सूची पूरी तरह दुरुस्त होगी।
सपा प्रमुख ने बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) के प्रशिक्षण को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि BLO को जिस तरह से प्रशिक्षण दिया गया, वह भी जांच का विषय है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि कई जगह एक ही नाम से एक से अधिक वोट दर्ज होने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि वह राजनीतिक दलों के साथ सहयोग करे और पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने केजीएमयू परिसर से जुड़ी चर्चाओं, आधार को मतदाता सूची से जोड़ने, जातिगत जनगणना और गोवंश संरक्षण जैसे मुद्दों पर भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गाय और पशुपालन से जुड़ी योजनाओं को लेकर सरकार के दावों और ज़मीनी हकीकत में अंतर दिखता है। अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के संपर्क में है और संवाद के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है।






