मोदी सरकार के खिलाफ की नारेबाजी, नए नियमों को बताया समाज के विभाजन की साजिश
संयुक्त सवर्ण संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने नए नियमों के विरोध में सौंपा ज्ञापन, वापसी की मांग
मुजफ्फरनगर। मोरना गांव में सोमवार को संयुक्त सवर्ण संघर्ष मोर्चा द्वारा एक रैली का आयोजन किया गया। यह रैली विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए नियमों के विरोध में निकाली गई। कार्यकर्ताओं ने मोरना के चरण सिंह चौक पर पहुंचकर यूजीसी कानून के विरोध में नारेबाजी भी की। हालांकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनवाई के दौरान इन नए नियमों पर रोक लगा दी है, 14 मार्च को अगली सुनवाई प्रस्तावित है, इसके बावजूद भी सवर्ण समाज में इस कानून को लाने के लिए मोदी सरकार के खिलाफ आक्रोश बना हुआ है।
संयुक्त सवर्ण समाज मोर्चा के पदाधिकारियों ने प्रदर्शन के दौरान यूजीसी एक्ट को समाज के विभाजन की साजिश बताते हुए कहा कि इससे जातिवाद का जहर घुलेगा और युवाओं का भविष्य बर्बाद हो जायेगा। रैली के दौरान, ठाकुर सुमीत चौहान, अंकित, वीरेंद्र, धर्मवीर सिंह, मैनपाल सिंह चौहान, प्रीतम और अंगुर सिंह सहित मोर्चा के सदस्यों ने क्षेत्राधिकारी के नाम एक ज्ञापन मोरना चौकी पुलिस को सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि यूजीसी का नया प्रावधान सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इससे उनकी शैक्षणिक, सामाजिक और मानसिक स्थिति प्रभावित होने की आशंका है। मोर्चा का मानना है कि यह स्थिति भारत के संविधान में निहित समानता के अधिकार और जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की मूल भावना के प्रतिकूल है।
भारतीय न्याय संहिता की भावना के अनुसार, किसी भी नागरिक के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए और झूठे मामलों से उसे प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए। कानून का उपयोग सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए होना चाहिए, न कि समाज को वर्गों और जातियों में विभाजित करने के लिए। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि यदि किसी कानून के दुरुपयोग की संभावना अधिक हो, तो वह सामाजिक तनाव, वैमनस्य और जातिगत संघर्ष को जन्म दे सकता है, जिससे देश की शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। मोर्चा ने स्पष्ट किया कि वे किसी विशेष वर्ग, जाति या समुदाय के विरोध में नहीं हैं। उनकी मुख्य मांग है कि सरकार ऐसे कानून बनाए जो सभी वर्गों के बीच भाईचारा, समानता और आपसी विश्वास को मजबूत करें। किसी एक वर्ग को असुरक्षित महसूस कराना राष्ट्रहित में नहीं है। संयुक्त सवर्ण संघर्ष मोर्चा ने सरकार से आग्रह किया है कि इस यूजीसी कानून पर पुनर्विचार किया जाए और इसे तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी वर्ग के विद्यार्थियों के साथ अन्याय न हो और कानून के दुरुपयोग को रोका जा सके।






