ट्यूबवैल ऑटोमेशन में बड़ा खेलः वर्क ऑर्डर के बाद भी रूकावट

जलकल विभाग में पुरानी और नई फर्म के बीच फंसे सहायक अभियंता अनुज कुमार की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

 

पुरानी फर्म से 20 लाख का नया सॉफ्टवेयर लगवाया, नई फर्म के वर्क ऑर्डर में फंसाया शर्त का पेंच

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् में कुछ अधिकारी और कर्मचारी अपनी मनमर्जी को व्यवस्था और नियमों पर इस कदर हावी कर रहे हैं कि शासन से लेकर प्रशासन तक भी हैरान है। ताजा मामला जलकल विभाग में शहरी क्षेत्र में पेयजलापूर्ति के लिए ट्यूबवैल के ऑटोमाइजेशन व्यवस्था के नए टैण्डर का है। करीब चार साल बाद इसके लिए खुली निविदा पालिका प्रशासन ने कराई तो पूरी अव्यवस्था की पोल खुलती नजर आ रही है।

इस नये टैण्डर में पुरानी फर्म के मोहपाश में फंसे विभागीय अधिकारियों ने नई फर्म के कदमों को रोकने के लिए पूरा तंत्र बुना और शासन से प्रशासन तक पहुंचे इस प्रकरण में अब एक और नया खुलासा हुआ है। इसमें विभागीय अधिकारियों ने पुरानी फर्म का हित साधने के लिए पहले तो टैण्डर खोलने में ही देरी की और टैण्डर खुले तो नई फर्म एल-1 श्रेणी में आने पर वो भौचक्क रहे गये, पुरानी फर्म ने हो हल्ला मचाया तो अधिकारियों ने नई फर्म को वर्क ऑर्डर देने में बहानेबाजी बनाई। शासन से प्रशासन स्तर तक का दबाव बना तो विभागीय स्तर पर वर्क ऑर्डर की प्रक्रिया शुरू की गई और ईओ से लेकर चेयरमैन तक को पूरी तरह से अंधेरे में रखते हुए यहां भी खेल कर दिया। बड़े अधिकारियों के जांच के आदेश के बावजूद भी जलकल विभाग ने ऐसा खेल रचा कि वर्क ऑर्डर जारी करने के बाद हाल फिलहाल में नई फर्म को कार्य शुरू करने का अधिकार नहीं मिला।

शहरी क्षेत्र में पेयजलापूर्ति के लिए नगरपालिका परिषद् के द्वारा ट्यूबवैल लगाये गये है। करीब दस साल पहले तक इनको मैनुअली ऑपरेट किया जाता था, इसमें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। करीब 2015 में तत्कालीन चेयरमैन पंकज अग्रवाल द्वारा शहरी क्षेत्र के सभी ट्यूबवैल को तकनीक से जोड़ते हुए यहां पर ऑटोमाइजेशन की शुरूआत की और इसके लिए टैण्डर निकाला गया। फर्म ने यहां पर स्काडा पैनल के माध्यम से सभी ट्यूबवैल का ऑटोमाइजेशन करते हुए पालिका मुख्यालय से सेंटर बनाकर उनको एक ही बटन से ऑपरेट करने की सुविधा शुरू कर दी थी। इसके बाद अंजू अग्रवाल ने इस व्यवसथा को सुचारू रखा। पिछले करीब चार साल से ट्यूबवैल ऑटोमाइजेशन का कार्य प्रियांक इंटरप्राइजेज गाजियाबाद देख रही है। हर साल नया टैण्डर करने के बजाये पालिका प्रशासन के द्वारा बोर्ड में इसी फर्म के टैण्डर को रिवाइज करा दिया जाता है। इस बार पालिका प्रशासन ने इसके लिए नया ओपन टैण्डर निकाला। ई टैण्डर में पांच फर्म आई और चार में से एक फर्म सर्वेस इंटरप्राइजेज प्रा. लि. लखनऊ एन-1 श्रेणी में स्वीकृत हो गई। यही ंसे बखेड़ा शुरू हो गया। पुरानी फर्म प्रियांक इंटरप्राइजेज के अंशुल और इंन्द्र ने आरोपों का ऐसा दौर शुरू किया कि हंगामा मच गया। मामला डीएम, कमिश्नर और प्रमुख सचिव तक पहुंचा है। कमिश्नर के द्वारा अपर आयुक्त को जांच सौपी गई है। वहीं नई फर्म सर्वेस के मालिक भी टैण्डर स्वीकृत होने के बाद वर्कऑर्डर न मिलने पर शिकायत मोड पर आ गये और अधिकारियों तक अपनी पीड़ा रखी। हंगामा मचा तो हड़कम्प भी खड़ा हो गया। आनन फानन में नई एल-1 फर्म सर्वेस इंटरप्राइजेज को जलकल विभाग की ओर से ट्यूबवैल ऑटोमाइजेशन का ठेका स्वीकृत करते हुए वर्क ऑर्डर दिया गया, इसमें भी बड़ा खेल कर दिया गया है। इसमें नई फर्म को काम शुरू करने के लिए एक शर्त लगा दी गई है। जलकल विभाग ने वर्क ऑर्डर में एक जुलाई से ही नई फर्म को मान्य किया है, जबकि पुरानी फर्म प्रियांक इंटरप्राइजेज के संचालकों का कहना है कि एई जलकल अनुज कुमार के कहने पर उन्होंने ऑटोमाइजेशन को और बेहतर तकनीक से जोड़ते हुए करीब 20-25 लाख खर्च कर नया सॉफ्टवेयर लगाया है, उम्मीद थी कि इस बार भी टैण्डर उनको ही हो जायेगा, लेकिन इस बार नियमों को ताक पर रखते हुए टैण्डर में ऐसी शर्तें लगाई गई, जो संदिग्ध हैं।

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पूरे मामले में ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह का कहना है कि शासन और प्रशासन के निर्देश पर पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है एई से रिपोर्ट तलब की गई है। विभागीय स्तर पर नई एल-1 फर्म सर्वेस इंटरप्राइजेज को नगरपालिका के सभी ट्यूबवैल के ऑटोमाइजेशन के कार्य के लिए वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है, लेकिन इसमें एक जुलाई से कार्य करने की शर्त शामिल है। तब तक पुरानी फर्म प्रियांक इंटरप्राइजेज ही काम करेगी। उनका भी कहना है कि प्रथम दृष्टया इस टैण्डर प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ी या मनमर्जी की गई है, जांच चल रही है, इसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।

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अपर आयुक्त ने अभिलेखीय साक्ष्यों सहित ईओ को किया तलब

 

जलकल विभाग में ट्यूबवैल ऑटोमाइजेशन के टैण्डर में गड़बड़ी की शिकायत प्रियांक एंटरप्राइजेज के संचालक इंद्र कुमार ने मंडलायुक्त से की है। उन्होंने अपर आयुक्त रमेश यादव को जांच सौंपी है। अपर आयुक्त ने निविदा की पत्रावलियों के साथ अधिशासी अधिकारी, जलकल विभाग के एई अनुज कुमार और अन्य सम्बंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को चार जून को 10 बजे तक कार्यालय में तलब किया था, लेकिन पत्रावली वहां नहीं भेजी गई और न ही अधिकारी पहुंचे थे। इसके विपरीत चार जून की दोपहर 12.30 बजे निविदा की वित्तीय बिड खोलकर नई फर्म को ठेका छोड़ दिया।

अब इसी मामले को लेकर जांच अधिकारी अपर आयुक्त रमेश यादव ने कड़ी नाराजगी जताते हुए अधिशासी अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा कि अंशुल सिंह प्रियांक ऑटोमेशन द्वारा एक जून को की गई छह बिन्दुओं वाली शिकायत के आधार पर बिन्दुवार सुस्पष्ट आख्या अभिलेखीय साक्ष्यों के साथ 4 जून को प्रातः दस बजे स्वयं उपस्थित होने के लिए निर्देशित किया गया था, लेकिन अधिशासी अधिकारी उपस्थित नहीं हुई और न ही कोई आख्या प्राप्त हुई। इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए नौ जून को प्रातः दस बजे अधिशासी अधिकारी को अभिलेखीय साक्ष्यों के साथ आख्या लेकर अपर आयुक्त रमेश यादव ने सहारनपुर मंडलायुक्त कार्यालय में तलब किया है।

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एई अनुज बोले-कोई धांधली नहीं, देरी का कारण जनगणना

नगरपालिका परिषद् के एई जलकल अनुज कुमार का इस सम्बंध में कहना है कि शहरी क्षेत्र में फिलहाल 81 में से 70 ट्यूबवैल ऑटोमाइजेशन से जुड़े हुए हैं। टैण्डर प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी रही है। पांच फर्मों ने इस ई टैण्डर में प्रतिभाग किया था। एक फर्म द्वारा वित्तीय निविदा में डीडी और जमानत राशि के दस्तावेज नहीं लगाये थे, जिस कारण उसको अयोग्य घोषित किया गया। योग्य चार फर्माें से में से सर्वेस इंटरप्राइजेज एल-1 श्रेणी की फर्म रही है, जिसको वर्क ऑर्डर जारी किया गया है। पुरानी फर्म से नये सॉफ्टवेयर के रूप में कोई खर्च नहीं कराया गया है। छोटी मोटी कमियों को ही सही कराया गया, कोई सॉफ्टवेयर नहीं बदलवाया गया है। जो भी शिकायत है, उसकी जांच की जा रही है, मैंने भी जेई से इस सम्बंध में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। जांच के आधार पर ही कार्यवाही की जायेगी। पूर्व में कई वर्षों से पुरानी फर्म को ही टैंण्डर रिवाइज बोर्ड की स्वीकृति के आधार पर होता रहा है। इस बार ही नया टैण्डर ऑनलाइन कराया गया है, इसमें कोई भी धांधली या गड़बड़ी नहीं पाई गई है। उनका कहना है कि जनगणना कार्य का दबाव होने के कारण ही टैण्डर और वर्क ऑर्डर में देरी हुई है।

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