प्राइवेट ऑपरेटर्स ने लगाए किसान नेताओं पर डग्गामारी कराने के आरोप, बोले- डग्गामार वाहनों के दबाव में प्रभावित हो रहा संचालन, प्रशासन से मांगी सुरक्षा और कार्रवाई
मुजफ्फरनगर। ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर परिवहन सुविधा से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन बस सेवा मुजफ्फरनगर में विवादों के घेरे में आ गई है। योजना के तहत संचालित बसों के प्राइवेट ऑपरेटर्स ने किसान सेना नामक संगठन के कुछ पदाधिकारियों पर बस संचालन में बाधा डालने, विवाद खड़ा करने और डग्गामार वाहनों के हित में काम करने के आरोप लगाए हैं। ऑपरेटर्स का कहना है कि अवैध परिवहन और प्रशासनिक स्तर पर आ रही परेशानियों के कारण योजना का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।
मुजफ्फरनगर में मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन बस सेवा से जुड़े प्राइवेट ऑपरेटर्स ने सोमवार को शहर के एक रेस्टारेंट में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान अपनी पीड़ा को सामने रखा। उन्होंने मीडिया कर्मियों के समक्ष आरोप लगाया कि डग्गामार वाहनों के प्रभाव के कारण योजना का सुचारु संचालन संभव नहीं हो पा रहा है। ऑपरेटर्स का कहना है कि किसान सेना के पदाधिकारी राशिद कुरैशी और साजिद द्वारा बस सेवा को रुकवाने के लिए निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं तथा अनावश्यक विवाद खड़े किए जा रहे हैं। ऑपरेटर्स ने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल क्षेत्र में डग्गामार वाहनों का संचालन किया जा रहा है और इन्हीं वाहनों को लाभ पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन सेवा की बसों के संचालन में बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। इन डग्गामार वाहनों में किसान सेना के नेताओं की भी प्राइवेट बसें शामिल हैं। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो वे योजना के अंतर्गत संचालित बसों को सरेंडर करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
प्राइवेट ऑपरेटर्स ने बताया कि जनपद में योजना के तहत 39 बसों के संचालन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिनमें से 26 बसों के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा परमिट जारी किए जा चुके हैं। बस संचालकों से पांच हजार रुपये एकमुश्त शुल्क लिया गया है, जबकि रोडवेज डिपो द्वारा पार्किंग रॉयल्टी के रूप में प्रतिमाह 1500 रुपये भी वसूले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत गांवों से ब्लॉक मुख्यालय तथा ब्लॉक से जिला मुख्यालय तक बस संचालन के लिए अनुमति दी गई है। इसके बावजूद पुलिस द्वारा बसों के चालान किए जा रहे हैं। ऑपरेटर्स के अनुसार अब तक करीब 100 से अधिक चालान किए जा चुके हैं, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बस संचालकों का कहना है कि उन्होंने यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए संचालन की विशेष व्यवस्था बनाई है, जिसके तहत एक समय में मुख्यालय पर केवल एक बस ही पहुंचेगी। वे यातायात पुलिस के सभी नियमों का पालन करने के लिए तैयार हैं, लेकिन प्रशासन को पहले डग्गामार वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। आरोप है कि डग्गामार वाहन चला रहे लोगों से मोटा पैसा भी वसूल किया जा रहा है, इसकी जांच होनी आवश्यक है। ऑपरेटर्स ने कहा कि हमने अधिकारियों को बताया कि अवैध वाहनों के संचालन के कारण कई ग्रामीण क्षेत्रों में तनाव की स्थिति बन रही है और आए दिन विवाद एवं झगड़े हो रहे हैं। समस्याओं के समाधान को लेकर अधिकारियों के साथ हुई बैठक में प्रशासन ने 15 दिन के भीतर आवश्यक कार्रवाई और समाधान का आश्वासन दिया है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 में मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना को मंजूरी दी थी। योजना का उद्देश्य उन ग्रामीण क्षेत्रों और ग्राम पंचायतों को सार्वजनिक परिवहन सुविधा से जोड़ना है, जहां अब तक नियमित बस सेवा उपलब्ध नहीं थी। योजना के तहत गांवों को ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालयों से जोड़ने के लिए छोटी एवं मध्यम क्षमता की बसों का संचालन कराया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण छात्रों, किसानों, मरीजों और आम नागरिकों को सुलभ, सुरक्षित और किफायती परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। योजना के माध्यम से प्रदेश के हजारों गांवों को परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन सेवा योजना के तहत प्राइवेट बस ऑपरेटर्स में विपिन कुमार गोयल, तौसीफ फारूकी, योगेन्द्र पाल, सलेक मलिक, राहुल मलिक, विकास जैन आदि मौजूद रहे।






