पीड़ित मालिक को कार्यवाही कराने के लिए पुलिस चौकी से एसएसपी कार्यालय तक खाने पड़े धक्के, कोर्ट से कराई एफआईआर
मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर जनपद में वाहन चोरी के एक मामले में पुलिस की लापरवाही उस समय उजागर हुई, जब डीसीएम ट्रक चोरी होने के करीब 16 महीने बाद न्यायालय के हस्तक्षेप से मुकदमा दर्ज किया गया। पीड़ित ट्रक मालिक द्वारा बार-बार गुहार लगाने के बावजूद पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, पुलिस अफसरों को भी पीड़ित ने अपनी बात बताई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होने के बाद न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
जिले के थाना भोपा क्षेत्र अंतर्गत डीसीएम चोरी के मामले में करीब 16 महीने बाद प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस द्वारा यह कार्रवाई सिविल जज (जूनियर डिवीजन) न्यायालय संख्या-1 के आदेश के बाद की गई। न्यायालय ने पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि मामले में मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इमरान पुत्र मुमताज निवासी ग्राम ढांसरी थाना ककरौली ने पुलिस से की गई शिकायत में बताया कि वह डीसीएम ट्रक संख्या यूपी 15 सीटी 7550 के पंजीकृत स्वामी हैं। इमरान ने न्यायालय में दी गई तहरीर में बताया कि 6 और 7 अक्टूबर 2024 की मध्यरात्रि वह अपना डीसीएम ट्रक लेकर ग्राम सीकरी में गन्ना भरने के लिए गए थे। ट्रक को उन्होंने गांव में मस्जिद के पास खड़ा कर दिया और रात में अपने रिश्तेदार के घर चले गए, ताकि सुबह गन्ना लोड कराया जा सके। बताया कि 7 अक्टूबर 2024 की सुबह करीब 7.30 बजे जब वह ट्रक के पास पहुंचे, तो वहां उनका वाहन मौजूद नहीं था। काफी तलाश के बाद भी ट्रक का कोई सुराग नहीं लग पाया, जिससे स्पष्ट हुआ कि अज्ञात चोरों ने वाहन चोरी कर लिया है। पीड़ित ने बताया कि यही ट्रक उनके रोजगार का एकमात्र साधन है।
इमरान का कहना है कि उसने उसी दिन थाना भोपा में लिखित सूचना दी, लेकिन पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की। इसके बाद 9 अक्टूबर 2024 को उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुजफ्फरनगर को भी प्रार्थना पत्र दिया, परंतु वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। लगातार अनदेखी से परेशान होकर अंततः पीड़ित को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। मामले की सुनवाई के बाद सिविल जज (जूनियर डिवीजन) न्यायालय संख्या-1 ने थाना भोपा पुलिस को आदेशित किया कि वाहन चोरी के मामले में तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की जाए। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में अब जाकर थाना भोपा में चोरी की प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब तक पीड़ित न्यायालय का दरवाजा नहीं खटखटाता, तब तक पुलिस क्यों कार्रवाई से बचती रहती है। फिलहाल पीड़ित को उम्मीद है कि अब उसके चोरी हुए डीसीएम ट्रक की बरामदगी हो सकेगी और उसे न्याय मिलेगा।






