72 लाख रुपये से खरीदी जाएंगी 19 हजार से ज्यादा पुस्तकें, बच्चों को वार्षिक व प्रतियोगी परीक्षाओं में मिलेगा मार्गदर्शन
मुजफ्फरनगर। ग्रामीण अंचलों में शिक्षा के स्तर को सुदृढ़ करने की दिशा में सरकार की ओर से बड़ा कदम उठाया गया है। जनपद के 80 गांवों में डिजिटल बाल एवं किशोर पुस्तकालयों में बच्चों को उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक पुस्तकों का भंडार उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उनकी शैक्षिक प्रतिभा को निखारने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायता मिलेगी। शिक्षा उन्नयन पर केंद्रित इस परियोजना के सहारे ग्रामीण बच्चों को ज्ञान का डिजिटल खजाना मिलेगा। 72 लाख की लागत से 80 गांवों के इन डिजिटल पुस्तकालयों में 19 हजार से ज्यादा पुस्तकें उपलब्ध कराने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। डिजिटल बाल पुस्तकालयों से छात्रों को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री मिलेगी। पुस्तक क्रय प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, प्रत्येक केंद्र पर 90 हजार रुपये की पुस्तकों की व्यवस्था की जायेगी।
जनपद की 80 ग्राम पंचायतों में डिजिटल पुस्तकालय (बाल एवं किशोर पुस्तकालय) स्थापित करते हुए उनको प्रारम्भ किए जाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। प्रत्येक पुस्तकालय में 239 पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए जिला पंचायत राज विभाग ने 72 लाख रुपये की लागत से पुस्तक क्रय की तैयारी पूरी कर ली है। जिला पंचायत राज अधिकारी रेनू श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन के पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा 17 मार्च 2025 को ग्राम पंचायत स्तर पर डिजिटल पुस्तकालय स्थापित करने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। शासन के निर्देशों के अनुपालन में जिलाधिकारी उमेश मिश्रा द्वारा पुस्तक चयन समिति का गठन किया गया, जिसने पुस्तकालयों के लिए उपयुक्त पुस्तकों का चयन किया।
चयनित पुस्तकों की खरीद के लिए गठित पुस्तक क्रय समिति से अनुमोदन प्राप्त होने के बाद 10 फरवरी 2026 को सरकारी जैम पोर्टल पर निविदा आमंत्रित की गई। निविदाएं 25 फरवरी 2026 को अपराह्न 2 बजे तक पोर्टल पर खुली रहेंगी, जिसके बाद उन्हें खोला जाएगा। बताया कि प्रथम चरण में तैयार 80 ग्राम पंचायतों के पुस्तकालयों के लिए पुस्तकों की खरीद शीघ्र की जाएगी। शासन के निर्देशों के अनुसार नॉन-एनबीटी पुस्तकें खरीदी जाएंगी। प्रत्येक पुस्तकालय के लिए 90 हजार रुपये की पुस्तकों की व्यवस्था की जाएगी। इस प्रकार 80 पुस्तकालयों के लिए कुल 72 लाख रुपये की पुस्तकें खरीदी जा रही हैं।
डीपीआरओ ने बताया कि इन डिजिटल पुस्तकालयों में उपलब्ध कराई जाने वाली पुस्तकें बच्चों को वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी के साथ-साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेंगी। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अब अपने ही गांव में गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध होगी, जिससे उनकी शैक्षिक उपलब्धियों में सकारात्मक परिवर्तन आने की उम्मीद है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह पहल ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें प्रतिस्पर्धी माहौल के लिए तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगी।




