देवबंद आतंकी नेटवर्क मामला एक बार फिर चर्चा में है। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक और हिंदूवादी नेता विकास त्यागी ने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा है कि न्यायालय ने अब तक की जांच पर असंतोष जताते हुए प्रमुख सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक को इस पूरे प्रकरण की पुनः गहन जांच कराने के निर्देश दिए हैं। त्यागी के अनुसार, यह मामला अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क और अवैध घुसपैठ से जुड़ी गंभीर आशंकाओं से संबंधित है।
उन्होंने पत्र में दारुल उलूम की गहन जांच की मांग भी उठाई है। विकास त्यागी ने कहा कि अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, देवबंद ने वाद संख्या 1905/2022, सरकार बनाम तलहा तालुकदार बिन फारूख की सुनवाई के दौरान पुलिस और एटीएस की पूर्व जांच में विसंगतियां पाई हैं। उनके मुताबिक, न्यायालय ने इस पर गंभीर रुख अपनाया है। पत्र में कहा गया है कि एक बांग्लादेशी नागरिक कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के सहारे पांच वर्षों तक दारुल उलूम के छात्रावास दर-ए-जदीद में रहा।
साथ ही, उसके पास से अलकायदा और तालिबान से जुड़ी 789 प्रतिबंधित फाइलें बरामद होने का भी हवाला दिया गया है। विकास त्यागी ने अपने पत्र में कहा कि न्यायालय के आदेश के बाद अब इस मामले की परतें दोबारा खोली जानी चाहिए। उनका कहना है कि इससे संस्थान की संभावित संलिप्तता और सुरक्षा चूक की जवाबदेही तय की जा सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस संवेदनशील मामले में जांच केवल औपचारिक न रहे, बल्कि सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल हो। त्यागी ने मांग की कि जांच की निगरानी उच्च स्तर पर की जाए।
विकास त्यागी ने कहा कि वह लंबे समय से देवबंद में चल रही कथित अवैध गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। उनके अनुसार, उनकी शिकायतों के बाद पहले भी अवैध हैलीपेड, अवैध वृहद पुस्तकालय और अन्य कथित अवैध निर्माण कार्यों के साथ हवाला और विदेशी फंडिंग से जुड़े मामलों पर रोक लगी थी। उन्होंने दावा किया कि उनकी ओर से की गई कई अन्य शिकायतों पर अभी भी जांच जारी है।
त्यागी ने आरोप लगाया कि दारुल उलूम के कारण देवबंद अंतरराष्ट्रीय आतंकियों की शरणस्थली बनता जा रहा है। विषय की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए विकास त्यागी ने मांग की है कि न्यायालय के आदेश के अनुरूप प्रमुख सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक की निगरानी में होने वाली जांच में दारुल उलूम के सभी रिकॉर्ड जब्त किए जाएं। इसके साथ ही, कथित हुंडी और हवाला नेटवर्क की जांच प्रवर्तन निदेशालय से कराए जाने की भी मांग की गई है। त्यागी का कहना है कि यदि इस दिशा में व्यापक जांच होती है तो पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है।
उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बताया है। विकास त्यागी ने बताया कि इस पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डभोल, गृह मंत्रालय के सचिव, खुफिया ब्यूरो के निदेशक, अनुसंधान एवं विश्लेषण विंग के निदेशक, तथा सहारनपुर के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी भेजी गई है। उनका कहना है कि ऐसा इसलिए किया गया है ताकि इस कथित अंतरराष्ट्रीय साजिश का पूरी तरह पर्दाफाश हो सके। पत्र के साथ उन्होंने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, देवबंद के दिसंबर 2025 के आदेश की छाया प्रति भी संलग्न की है।
फिलहाल इस मामले में विकास त्यागी की ओर से की गई मांग और न्यायालयीय आदेश का हवाला राजनीतिक, प्रशासनिक और सुरक्षा स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि पुनः विवेचना की प्रक्रिया किस रूप में आगे बढ़ती है और जांच एजेंसियां क्या रुख अपनाती हैं।






