चुनाव के बाद शनिवार को हुई मतगणना, महासचिव पद पर सतेन्द्र पाल चुनाव जीते
मुजफ्फरनगर। सिविल बार एसोसिएशन चुनाव में अध्यक्ष पद पर सुगंध जैन ने बिजेन्द्र मलिक को 52 मतो से हराया। जबकि महासचिव पद पर सतेन्द्र पाल ने अन्नु कुच्छल को 121 मतो से हराकर जीत दर्ज की। अध्यक्ष, वरिष्ठ उपाध्यक्ष और उपाध्यक्ष सहित आठ पदों के लिए मतगणना पूर्ण कर ली गई। जबकि चार वरिष्ठ एवं चार कनिष्ठ सदस्य एवं दो महिला वरिष्ठ और दो महिला कनिष्ठ सदस्य पद के लिए परिणाम देर से आये।
सिविल बार एसोसिएशन अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं महासचिव सहित सभी पदो के लिए शनिवार को मतगणना पूर्ण कर ली गई। मतगणना के आधार पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर संजीव त्यागी ने अशोक कुशवाहा को हराकर जीत दर्ज की। उपाध्यक्ष पद पर सुधीर गुप्ता जीते। उन्होंने आनंद कुमार को हराया। कोषाध्यक्ष पद पर मानसी शर्मा ने रंजना देवी को हराया। सह सचिव प्रशासन के पद पर प्रवीण उपाध्याय ने रूपांकर गुप्ता को हराया। सह सचिव लेखा के पद पर प्रशांत शर्मा ने जीत दर्ज की। उन्होंने ध्रुव पाल को हराया।
जबकि सह सचिव पुस्तकालय के पद पर रेखा शाही जीती। उन्होंने नुपुर को हराया। चुनाव परिणाम आने के बाद अधिवक्ताओं ने अध्यक्ष और महासचिव पद पर विजयी रहे प्रत्याशियों का फूल माला पहनाकर स्वागत किया। शनिवार को परिणाम ने ये चुनावी जंग समाप्त कर दी है। सिविल बार एसोसिएशन के मुख्य पदों पर सीधी टक्कर बनी नजर आई। अध्यक्ष पद पर बिजेंद्र सिंह मलिक और सुगंध जैन में परिणाम आने तक कांटे का मुकाबला होता रहा। प्रत्याशियों ने चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी थी।
सौ साल का स्वर्णिम इतिहास, बार अध्यक्ष द्वारका प्रसाद रहे विधायक
मुजफ्फरनगर सिविल बार एसोसिएशन का सौ साल का स्वर्णिम इतिहास है। बार के सदस्य द्वारिका प्रसाद कांग्रेस के टिकट पर शहर से दो बार विधायक भी रहे। सिविल बार की स्थापना वर्ष 1926 में हुई थी। इस बार चुनाव के बाद शताब्दी वर्ष मनाने की तैयारी भी चल रही है। कभी एक पेड़ के नीचे बैठकर ही सिविल के अधिवक्ता लोगों के इंसाफ की लड़ाई लड़ते थे। मुजफ्फरनगर मध्य के नाम से सीट पर वर्ष 1952 में कांग्रेस के टिकट पर अधिवक्ता द्वारिका प्रसाद ने सोसलिस्ट पार्टी के ब्रह्म प्रकाश को हराकर चुनाव जीता था। इसके अलावा वर्ष 1957 में मुजफ्फरनगर विधानसभा सीट से ही द्वारिका प्रसाद ने 25251 वोट हासिल कर विपक्षी उम्मीदवार प्रेमसुख को हराया था। 25 फरवरी 1957 को यह नतीजे घोषित किए गए थे। प्रेमसुख को सिर्फ 8354 वोट ही हासिल हुए थे। द्वारिका प्रसाद नामचीन अधिवक्ता रहे और डिप्टी स्पीकर भी उन्हें बनाया गया था। वह कांग्रेस के मजबूत जनप्रतिनिधियों में शामिल रहे।






