पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए असम चुनाव के लिए बाहरी वोटर लाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा को असम के मतदाताओं पर भरोसा नहीं था, इसलिए बाहर से लोगों को वहां लाया गया। इसी दौरान उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि “सांप पर भरोसा किया जा सकता है, लेकिन भाजपा पर नहीं।” ममता बनर्जी ने यह बयान उत्तर 24 परगना जिले के तेंतुलिया में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए दिया।
उनका यह हमला ऐसे समय आया है, जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। ममता बनर्जी ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी असम के निवासियों के वोट के दम पर अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नहीं थी। इसी वजह से उसने चुनाव के लिए बाहर से लोगों को वहां पहुंचाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश से 50,000 लोगों को लेकर एक पूरी ट्रेन असम भेजी गई।
उनके मुताबिक, केंद्र में भाजपा की सरकार रहने के कारण देश की कोई भी एजेंसी तटस्थ नहीं रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने सबको अपने प्रभाव में ले लिया है। असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव के लिए बृहस्पतिवार को एक चरण में मतदान हुआ था। इसी पृष्ठभूमि में ममता बनर्जी ने भाजपा पर यह गंभीर आरोप लगाए। रैली के दौरान ममता बनर्जी का सबसे तीखा बयान भाजपा को लेकर सामने आया।
उन्होंने कहा कि “सांप पर भरोसा किया जा सकता है, लेकिन भाजपा पर नहीं।” इस टिप्पणी को चुनावी माहौल में भाजपा के खिलाफ उनके सबसे आक्रामक हमलों में माना जा रहा है। ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के मतदाताओं से अपील करते हुए कहा कि राज्य की सभी 294 सीटों पर लोग उन्हें ही उम्मीदवार समझें। उन्होंने कहा कि अगर लोग प्रदेश में उनके नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस की सरकार चाहते हैं, तो वे यह मानें कि हर सीट पर वही उम्मीदवार हैं।
ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि बहुत से अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों के नाम चुनावी सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि उनके अपने निर्वाचन क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जनता पर भरोसा है। ममता बनर्जी के शब्दों में, वोटर सूची में जो भी नाम बचे हुए हैं, वे सभी उन्हें ही मिलेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान मतदाता सूची से 90 लाख नाम हटा दिए गए हैं। तृणमूल प्रमुख ने कहा कि एक अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार, हटाए गए इन 90 लाख नामों में 60 लाख हिंदुओं के और 30 लाख मुसलमानों के नाम शामिल हैं।






