MUZAFFARNAGAR PALIKA-11 माह से निलम्बित लिपिक मनोज की पत्रावली गायब

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् में कर विभाग के निलम्बित लिपिक मनोज पाल की जांच को लेकर अब नया खुलासा हुआ है। मनोज पाल पर लगाये गये आरोपों को लेकर की जा रही जांच कभी पूरी हुई ही नहीं। 11 महीनों से केवल इस मामले में गुमराह करने का काम होता रहा। 11 महीनों से निलम्बित लिपिक मनोज पाल आरोप पत्र पर स्पष्टीकरण देने के बाद जांच पूरी करने का कई बार आग्रह कर चुके हैं, लेकिन जांच पूरी तो तब हो, जबकि जांच शुरू की जाये। जी हां! निलम्बित लिपिक मनोज पाल के प्रार्थना पत्र पर जब ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने जांच अधिकारी कर अधीक्षक नरेश शिवालिया से सुस्पष्ट जांच आख्या मांगी तो बड़ा खुलासा हुआ, जिससे खुद ईओ भी भौचक्क रह गई। जिन आरोपों को लेकर लिपिक के खिलाफ जांच हुई और उनको निलम्बित किया गया, उस जांच पत्रावली से जांच के प्रपत्र ही गायब हो गये। उनके खिलाफ जांच आख्या के प्रपत्र पालिका में उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर जांच अधिकारी ने भी अपने हाथ खड़े कर ईओ को सुझाव दिया है कि वो जांच करने वाले एडीएम और शासन से ही प्रपत्र मंगवायें तो कदम आगे बढ़ाया जा सकता है।

संपत्ति के दाखिल खारिज प्रकरण में गलत ढंग से नामांतरण करने का आरोप लगाते हुए अनु शुक्ला पुत्र रवि शंकर शुक्ला निवासी गुदडी बाजार ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर 24 मार्च, 2023 को शिकायत करते हुए जांच कराने और दोषियों पर कार्यवाही करने की मांग की थी। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री कार्यालय से विशेष सचिव उत्तर प्रदेश शासन, नगर विकास लखनऊ को जांच अग्रसारित की गई थी। विशेष सचिव के द्वारा जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर से जांच आख्या मांगी गई थी। इसमें जिलाधिकारी ने एडीएम वित्त एवं राजस्व को जांच सौंपी गई थी। एडीएम की जांच आख्या के आधार पर दाखिल खारिज प्रकरण में कार्यवाही करते हुए कर विभाग के लिपिक मनोज पाल को 01 जून 2023 को निलम्बित करने के आदेश पालिका ईओ को दिय गये थे। 07 जून को ईओ हेमराज सिंह ने मनोज को सस्पेंड कर आरोप पत्र जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसके साथ ही कर अधीक्षक नरेश शिवालिया को इस प्रकरण में जांच अधिकारी नामित कर दिया गया था। मनोज ने आरोपों को लेकर अपना स्पष्टीकरण भी जांच अधिकारी को सौंप दिया गया था। कर अधीक्षक ने अपनी जांच आख्या 16 दिसम्बर 2023 को ईओ हेमराज सिंह को सौंप दी थी, लेकिन इसके बाद बीते 11 महीनों में कोई भी निर्णय नहीं लिया गया।

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मनोज पाल ने ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह को प्रार्थना पत्र देते हुए उनके खिलाफ लंबित जांच प्रकरण को अनावश्यक रूप से लटकाने के आरोप लगाये गये और जल्द निस्तारण की मांग की गई थी। ईओ प्रज्ञा सिंह ने जांच आख्या तलब की थी, 27 मई को जांच अधिकारी कर अधीक्षक नरेश शिवालिया ने अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की, लेकिन ईओ ने इसको दरकिनार करते हुए सुस्पष्ट आख्या प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया था। अब कर अधीक्षक नरेश शिवालिया ने अपनी स्पष्ट आख्या ईओ को सौंप दी है, इसमें उन्होंने जो तथ्य सामने रखे, वो चौंकाने वाले हैं।

कर अधीक्षक ने बताया कि शासन के आदेश पर कमिश्नर सहारनपुर ने एडीएम वित्त से प्रकरण में जांच कराई थी। उनकी रिपोर्ट पर ही 11 महीने पूर्व मनोज पाल को निलम्बित किया गया। बताया कि इस प्रकरण की समस्त जांच सम्बन्धी प्रक्रिया एडीएम वित्त एवं राजस्व के कार्यालय से सम्पादित हुई है तथा उनके द्वारा की गई जांच के आवश्यक प्रपत्र पालिका कार्यालय अथवा कर विभाग में उपलब्ध ही नहीं हैं। पालिका में उपलब्ध प्रपत्रों के आधार पर ही उनके द्वारा अपनी जांच आख्या दिसम्बर 2023 में तत्कालीन ईओ हेमराज सिंह के समक्ष प्रेषित कर दी गई थी। उनका कहना है कि जबकि पालिका कार्यालय या कर विभाग में जांच सम्बंधित पत्रावली में जांच प्रपत्र ही उपलब्ध नहीं है, तो ऐसे में उनके माध्यम से इस प्रकरण में जांच की कार्यवाही नहीं की जा सकती है। उन्होंने ईओ को सुझाव दिया है कि इस प्रकरण का निस्तारण या सम्पूर्ण जांच कराने के लिए एडीएम वित्त के कार्यालय अथवा विशेष सचिव नगर विकास अनुभाग-2, लखनऊ से सम्पर्क कर गायब हुए समस्त जांच प्रपत्र प्राप्त किये जाने के उपरांत ही प्रकरण की वास्तविक जांच करते हुए आख्या उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे साफ है कि 11 महीनों तक मनोज पाल के खिलाफ जांच को लेकर हीला-हवाली ही होती रही। पहले ही दिन से साफ था कि उनके खिलाफ लगाये गये आरोपों को लेकर हो रही जांच के प्रपत्र पालिका की पत्रावली से गायब कर दिये गये हैं। ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने थोड़ी सख्ती दिखाई तो सारा प्रकरण खुलकर सामने आ गया है। अब इन प्रपत्रों को गायब करने में किसका हाथ रहा है, यह भी जांच का विषय बन गया है।

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लिपिक मनोज पाल की सेवा पुस्तिका और मूल पत्रावली भी गायब

मुजफ्फरनगर नगरपालिका परिषद् में महत्वपूर्ण पत्रावलियों के गायब होने और कुछ कर्मचारियों द्वारा पत्रावलियों को अपने घर पर रखने के आरोपों को लेकर जांच की मांग उठती रही है। सभासद मनोज वर्मा और राजीव शर्मा ने भी ऐसे प्रकरणों को उठाते हुए जांच की मांग की है। विगत दिनों ही पालिका चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप ने सभी विभागाध्यक्षों से उनकी विभागीय और विभाग के कर्मचारियों की मूल पत्रावलियों तथा सेवा पुस्तिकाओं की स्थिति पर रिपोर्ट तलब की है। ऐसे में अब निलम्बित लिपिक मनोज पाल की जांच के मामले में ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह की सख्ती के बाद दूसरा चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि उनकी मूल व्यक्तिगत पत्रावली और सेवा पुस्तिका पालिका में उपलब्ध ही नहीं है। जांच अधिकारी कर अधीक्षक नरेश शिवालिया ने ईओ को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा कि जांच के दौरान उनके संज्ञान में आया कि निलम्बित लिपिक मनोज पाल की मूल व्यक्तिगत पत्रावली एवं सेवा पुस्तिका कर विभाग में संरक्षित नही है। उन्होंने ईओ को बताया कि उनके द्वारा 19 जनवरी 2023 में नगर पालिका के कर अधीक्षक के रूप में अपना कार्यभार ग्रहण किया था तथा उससे पूर्व से ही कर विभाग में लिपिक मनोज पाल की व्यक्तिगत पत्रावली एवं सेवा पुस्तिका अनुपलब्ध बताई जा रही है। जब जांच मिली तो उन्होंने इस सम्बन्ध में कर विभाग के वर्तमान एवं पूर्व अधिष्ठान लिपिकों से लिखित रूप में जानकारी प्राप्त की गई, जवाब में उनके द्वारा अभी तक भी कोई स्पष्ट या तथ्यात्मक उत्तर उनके समक्ष प्रस्तुत नहीं किया है, उन्होंने कहा कि इसको लेकर भी उनके द्वारा गहनतापूर्वक जांच की जा रही है। जिसमें दोषी कर्मचारी के खिलाफ कार्यवाही के लिए संस्तुति सहित आख्या ईओ के समक्ष उपलब्ध करा दी जायेगी।

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कर अधीक्षक के जवाब से ईओ डॉ. प्रज्ञा भौचक्क

मुजफ्फरनगर नगरपालिका के निलम्बित लिपिक मनोज पाल की जांच को लेकर जांच अधिकारी कर अधीक्षक नरेश शिवालिया द्वारा दिये गये जवाब से ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह भी भौचक्क रह गई हैं। 11 महीनों से चल रही जांच में अब आकर यह खुलासा हुआ है कि जांच पत्रावली से कई प्रपत्र गायब है, जिनके कारण जांच पूरी ही नहीं की जा सकी है। ईओ डॉ. प्रज्ञा ने बताया कि मनोल पाल ने प्रार्थना पत्र देकर उनके खिलाफ लंबित जांच पूर्ण कराने की मांग की थी, जिसको लेकर जांच अधिकारी कर अधीक्षक नरेश शिवालिया से स्पष्ट आख्या मांगी गई। इसमें उन्होंने बताया है कि प्रकरण में पूर्व में उच्चाधिकारियों के द्वारा की गई जांच के समस्त प्रपत्र उपलब्ध ना होने की दशा में कोई जांच आख्या प्रस्तुत किया जाना सम्भव नही है। प्रपत्र ही नहीं मिल पा रहे हैं। पत्रावली से काफी संख्या में पेज गायब कर दिये गये हैं, जो बेहद गंभीर मामला है। पूर्व में जब भी उनसे कहा गया तो उन्होंने जांच करने की बात कही थी, अब जांच पूरी नहीं होने की बात बता रहे हैं। एडीएम वित्त या शासन से प्रपत्र मंगाने का सुझाव दिया गया है। प्रकरण में चेयरपर्सन से वार्ता कर अग्रिम कार्यवाही की जायेगी। 

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