अमित शाह NIA गिरफ्तारी मामले पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कहा है कि गलत इरादे से भारत आने वाले विदेशी नागरिकों को बिल्कुल बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाल ही में गिरफ्तार अमेरिकी और यूक्रेनी नागरिकों से भारत को तत्काल कोई खतरा नहीं था, लेकिन उनकी गतिविधियां गंभीर साजिश की ओर इशारा करती हैं।
गृह मंत्री ने बताया कि यह समूह भारत का इस्तेमाल केवल म्यांमार पहुंचने के ट्रांजिट मार्ग के रूप में कर रहा था। ये लोग मिजोरम के रास्ते म्यांमार जाकर वहां के विद्रोही गुटों से जुड़ना चाहते थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इन विदेशी नागरिकों का उद्देश्य म्यांमार में आतंकी प्रशिक्षण लेना और देना था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने कुल 7 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है: 3 यूक्रेनी नागरिक दिल्ली से, 3 यूक्रेनी नागरिक लखनऊ से, 1 अमेरिकी नागरिक कोलकाता से जांच में सामने आया कि सभी आरोपी वैध वीजा पर भारत आए, लेकिन बिना अनुमति के संरक्षित क्षेत्र मिजोरम में प्रवेश कर गए।
जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों ने: म्यांमार में घुसपैठ कर विद्रोही गुटों से संपर्क किया, वहां ट्रेनिंग ली और ट्रेनिंग दी, यूरोप से ड्रोन की खेप भारत के रास्ते लाई, इन पर हथियार सप्लाई, आतंकी हार्डवेयर उपलब्ध कराने और एके-47 राइफल ले जाने वाले आतंकवादियों से संपर्क में होने के आरोप हैं। इन सभी के खिलाफ यूएपीए की धारा 18 (आतंकी साजिश) और भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज किया गया है। विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने: आरोपियों की 10 दिन की अतिरिक्त कस्टडी मंजूर की, सुनवाई एनआईए मुख्यालय में सुरक्षा कारणों से हुई
जांच एजेंसी ने बताया कि पूछताछ में और संदिग्धों के नाम सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की जांच जारी है। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा: “इनसे भारत की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं था, लेकिन हमारी नीति स्पष्ट है—अगर कोई विदेशी गलत इरादे से भारत आता है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।” नक्सलवाद को खत्म करने की समयसीमा पर पूछे गए सवाल पर अमित शाह ने कहा कि सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने कहा: यह जीत या हार का मुद्दा नहीं, मुख्य लक्ष्य हमलों और विस्फोटों को पूरी तरह रोकना है उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें नक्सलवाद को देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती बताया गया था।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नक्सलवाद पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है। उन्होंने बताया कि अब तिरुपति-पशुपतिनाथ कॉरिडोर के तहत आने वाले आदिवासी क्षेत्रों में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। यह पूरा मामला साफ करता है कि भारत अब किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधियों को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रहा है और विदेशी नागरिकों की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है।





