देवरिया | देवरिया जिला जेल में बंद पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को जिला अदालत से जमानत मिल गई है। अदालत के आदेश के बाद अब परवाना जेल प्रशासन तक पहुंचते ही उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यह मामला उनकी पत्नी के नाम खरीदी गई जमीन से जुड़े कथित दस्तावेजी विवाद से संबंधित है।
हालांकि, इसी प्रकरण में उनकी पत्नी नूतन ठाकुर को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिससे उनकी गिरफ्तारी की आशंका बनी हुई है।
गिरफ्तारी से अनशन तक
अमिताभ ठाकुर को 9 दिसंबर की देर रात शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन से पुलिस ने हिरासत में लिया था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उन्होंने जेल में अनशन शुरू कर दिया था। इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके चलते पहले गोरखपुर और फिर लखनऊ स्थित पीजीआई में उनका इलाज कराया गया।
कोर्ट की टिप्पणी: हिरासत जरूरी नहीं
सोमवार को देवरिया जिला न्यायालय में उनकी जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रवीण द्विवेदी ने दलील दी कि मामला बेहद पुराना है और इसमें किसी आपराधिक साजिश या धोखाधड़ी की मंशा नहीं दिखती। उनके अनुसार, पूरा विवाद दस्तावेजों में हुई तकनीकी त्रुटियों से जुड़ा है।
वहीं, अभियोजन पक्ष ने मामले की गंभीरता का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला जज ने कहा कि आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है और जांच के लिए उनका लगातार जेल में रहना आवश्यक नहीं है। इसी आधार पर कोर्ट ने अमिताभ ठाकुर को जमानत देने का आदेश पारित किया।
पत्नी को राहत नहीं, हाईकोर्ट का विकल्प खुला
अदालत ने साफ किया कि इस आदेश का लाभ नूतन ठाकुर को नहीं मिलेगा। उनकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज होने के बाद अब उनके पास हाईकोर्ट जाने का ही विकल्प बचा है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, हाईकोर्ट से राहत न मिलने की स्थिति में उनकी गिरफ्तारी कभी भी हो सकती है।
क्या है पूरा जमीन विवाद
यह मामला वर्ष 1999 का बताया जा रहा है, जब अमिताभ ठाकुर देवरिया में एसपी के पद पर तैनात थे। आरोप है कि औद्योगिक क्षेत्र में खरीदे गए एक प्लॉट की रजिस्ट्री के दौरान दस्तावेजों में नाम और पहचान से जुड़ी प्रविष्टियों में अंतर दर्ज किया गया। रजिस्ट्री में नूतन ठाकुर का नाम कथित तौर पर नूतन देवी और अमिताभ ठाकुर का नाम अभिजात दर्ज होने की बात सामने आई।
इन्हीं तथ्यों के आधार पर शिकायतकर्ता पक्ष ने इसे कूटरचना और धोखाधड़ी से जुड़ा मामला बताया। आरोप है कि दस्तावेजों में जानबूझकर गलत जानकारी दर्ज कराई गई, जिससे बाद में कानूनी विवाद खड़ा हुआ।
सालों बाद दोबारा खुली फाइल
यह प्रकरण लंबे समय तक कार्रवाई से बाहर रहा, लेकिन सितंबर 2025 में लखनऊ के तालकटोरा थाने में केस दर्ज होने के बाद जांच दोबारा शुरू हुई। जांच के दौरान पुलिस ने अमिताभ ठाकुर की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए उन्हें आरोपी बनाया। इसके बाद 10 दिसंबर 2025 को उन्हें गिरफ्तार कर देवरिया जेल भेज दिया गया।
अब जिला अदालत से मिली जमानत के बाद जहां अमिताभ ठाकुर को राहत मिली है, वहीं इस मामले में कानूनी लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म होती नजर नहीं आ रही है।






