दिल्ली आबकारी नीति मामला: ईडी पहुंची हाईकोर्ट, 16 मार्च को सुनवाई

दिल्ली आबकारी नीति मामला एक बार फिर न्यायिक चर्चा में आ गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय ने भी ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियों को हटाने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। इस याचिका पर अदालत ने सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च के लिए तय की है। प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत से आग्रह किया है कि 27 फरवरी के आदेश में एजेंसी के खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाया जाए।

एजेंसी का कहना है कि ट्रायल कोर्ट ने बिना उसका पक्ष सुने उसके खिलाफ सख्त टिप्पणियां कर दीं। प्रवर्तन निदेशालय की अर्जी पर न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ सुनवाई कर रही है। एजेंसी की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू अदालत में पक्ष रख रहे हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि जिस मामले में एजेंसी के खिलाफ टिप्पणियां की गई हैं, उससे प्रवर्तन निदेशालय का प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। इसके बावजूद अदालत ने एजेंसी को सुने बिना ही कठोर टिप्पणियां कर दीं।

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न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि मामला पहले से ही अदालत में चुनौती के अधीन है। इसलिए सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर दिया गया है और सुनवाई 16 मार्च को होगी। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने राउज एवेन्यू कोर्ट की ओर से केंद्रीय जांच ब्यूरो और उसके जांच अधिकारी के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों पर रोक लगा दी थी। सीबीआई की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 23 लोगों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

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इस मामले की भी सुनवाई 16 मार्च को ही तय की गई है। प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी याचिका में कहा है कि ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां अत्यधिक और अनावश्यक हैं। एजेंसी का आरोप है कि अदालत ने अनुमान के आधार पर और बिना उसका पक्ष सुने कठोर टिप्पणियां कीं। ईडी ने दिल्ली हाईकोर्ट से अपील की है कि मनी लॉन्ड्रिंग जांच से संबंधित ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों को हटाया जाए। दरअसल, दिल्ली आबकारी नीति मामला आम आदमी पार्टी सरकार की वर्ष 2021 की आबकारी नीति से जुड़ी कथित गड़बड़ियों से संबंधित है। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय दोनों अलग-अलग जांच कर रहे हैं।

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विशेष जज जितेंद्र सिंह की अदालत ने हाल ही में सीबीआई के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत 23 अन्य लोगों को आरोपमुक्त करते हुए पीएमएलए और ईडी की जांच को लेकर कई सख्त टिप्पणियां की थीं। अब इन टिप्पणियों को लेकर मामला दिल्ली हाईकोर्ट में पहुंच गया है, जहां 16 मार्च को महत्वपूर्ण सुनवाई होने वाली है।

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