- एटा के पिलुआ क्षेत्र में 14 वर्षीय किशोर की शादी कराए जाने की तैयारी चल रही थी।
- सूचना मिलने पर चाइल्ड हेल्पलाइन, एएचटी टीम और पुलिस मौके पर पहुंची।
- जांच में सामने आया कि बड़े भाई की शादी तय थी, लेकिन वह शादी से पहले घर छोड़कर चला गया।
- इसके बाद परिवार ने दबाव में छोटे नाबालिग भाई की शादी कराने की तैयारी शुरू कर दी।
- टीम ने हस्तक्षेप कर शादी रुकवाई और किशोर को सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश किया।
- अधिकारियों के अनुसार, जिस युवती से शादी कराई जा रही थी, उसकी शादी बाद में कहीं और करा दी गई।
एटा: उत्तर प्रदेश के एटा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने बाल विवाह और पारिवारिक दबाव दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां शादी से ठीक पहले परिवार में ऐसा मोड़ आया कि बड़े भाई की जगह 14 वर्षीय छोटे भाई को दूल्हा बनाकर बारात भेजने की तैयारी शुरू कर दी गई। सूचना मिलते ही चाइल्ड हेल्पलाइन, एएचटी टीम और पुलिस मौके पर पहुंची और शादी रुकवा दी।
मामला थाना पिलुआ क्षेत्र के एक गांव का बताया गया है। अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार को सूचना मिली थी कि गांव में एक नाबालिग किशोर की शादी कराई जा रही है और उसकी बारात फिरोजाबाद जानी थी। शिकायत के बाद चाइल्ड हेल्पलाइन टीम, वन स्टॉप सेंटर से जुड़ी टीम, एएचटी यूनिट और स्थानीय पुलिस गांव पहुंची।
बड़े भाई की शादी थी, लेकिन कहानी बदल गई
प्राथमिक जानकारी में टीम को पता चला कि परिवार में शादी बड़े भाई की तय थी। उसी की बारात निकलनी थी। लेकिन शादी से एक दिन पहले वह रिश्ते की मामी के साथ घर छोड़कर चला गया। इस घटनाक्रम के बाद परिवार पर सामाजिक और रिश्तेदारी का दबाव बढ़ गया।
यहीं से मामला और उलझ गया। अधिकारियों के मुताबिक, परिवार ने हालात संभालने के नाम पर बड़े भाई की जगह उसके 14 वर्षीय छोटे भाई की शादी कराने की तैयारी शुरू कर दी। यानी एक वयस्क शादी की जगह मामला सीधे बाल विवाह में बदल गया।
बारात निकलने से पहले पहुंच गई टीम
सूचना के आधार पर जब चाइल्ड हेल्पलाइन और पुलिस टीम मौके पर पहुंची, तब शादी की तैयारियां चल रही थीं। जांच में किशोर की उम्र करीब 14 साल पाई गई। इसके बाद टीम ने तत्काल हस्तक्षेप किया और विवाह रुकवा दिया।
अधिकारियों ने नाबालिग किशोर को अपने संरक्षण में लिया और आगे की प्रक्रिया के तहत उसे बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश किया। मामले में कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
युवती की उम्र 23 साल बताई गई
हेल्पलाइन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, जिस युवती से किशोर की शादी कराई जा रही थी, उसकी उम्र करीब 23 वर्ष बताई गई। यानी दोनों की उम्र में बड़ा अंतर भी था और लड़का कानूनन विवाह योग्य आयु से काफी कम था।
भारत में लड़कों के लिए विवाह की न्यूनतम कानूनी आयु 21 वर्ष और लड़कियों के लिए 18 वर्ष है। ऐसे में 14 वर्षीय किशोर की शादी कराना साफ तौर पर कानून का उल्लंघन माना जाएगा।
लड़की की शादी दूसरी जगह कराई गई
टीम की कार्रवाई के बाद शादी रुक गई। अधिकारियों ने बताया कि बाद में जानकारी मिली कि जिस युवती की शादी यहां तय थी, उसका विवाह कहीं और करा दिया गया। हालांकि इस हिस्से में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
मामला सिर्फ परिवार का नहीं, कानून का भी है
यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ एक पारिवारिक विवाद या सामाजिक असहजता की कहानी नहीं है। यह मामला दिखाता है कि कई बार परिवार, इज्जत या दबाव के नाम पर नाबालिग बच्चों को ऐसे फैसलों में धकेल दिया जाता है, जिनका असर उनकी पूरी जिंदगी पर पड़ सकता है।
समय रहते शिकायत दर्ज होना और टीम का मौके पर पहुंचना इस मामले में सबसे अहम साबित हुआ। अगर सूचना देर से मिलती, तो एक नाबालिग की शादी हो चुकी होती।
प्रशासन की कार्रवाई ने टाली बड़ी गलती
इस मामले में चाइल्ड हेल्पलाइन, एएचटी टीम और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई ने एक संभावित बाल विवाह रुकवाया। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया में यह देखा जाएगा that नाबालिग को विवाह के लिए तैयार करने, दबाव बनाने और कानून तोड़ने की कोशिश में किन लोगों की क्या भूमिका रही।
बाल विवाह केवल सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि कानूनी अपराध भी है। एटा का यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि परिवार की मुश्किल, सामाजिक दबाव या रिश्तेदारी की शर्मिंदगी—इनमें से कोई भी वजह नाबालिग की शादी का आधार नहीं बन सकती।






