खाड़ी युद्ध का यूपी निर्यात पर असर अब साफ दिखाई देने लगा है। ईरान पर हमले के बाद खाड़ी देशों में बढ़ती अस्थिरता से उत्तर प्रदेश के निर्यातक चिंतित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यूएई को होने वाले करीब 11 हजार करोड़ रुपये के निर्यात पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ सकता है, जिसमें जेम-एंड-ज्वैलरी और मीट कारोबार प्रमुख हैं। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण प्रदेश के मीट, चीनी और चावल कारोबारियों की बेचैनी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो प्रदेश के निर्यात को बड़ा झटका लग सकता है।
पहल इंडिया फाउंडेशन के सहायक शोधकर्ता जशन कक्कड़ के अनुसार यूएई, ईरान की तुलना में उत्तर प्रदेश के लिए कहीं बड़ा निर्यात बाजार है। उन्होंने बताया कि प्रदेश से यूएई को लगभग 27 प्रतिशत नगों (रत्न) और सोने-चांदी के आभूषणों की सप्लाई होती है। इसके अलावा यूएई को 15 प्रतिशत से अधिक मीट का निर्यात होता है। गारमेंट और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की सप्लाई भी पांच प्रतिशत से अधिक है। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में युद्ध या अस्थिरता का सीधा असर इन कारोबारों पर पड़ सकता है।
ईरान को प्रदेश से मेडिकल उपकरणों की सप्लाई भी होती है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने से इन सभी व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खाड़ी क्षेत्र में शिपिंग मार्ग और लाजिस्टिक्स नेटवर्क अस्थिर होते हैं, तो माल भाड़ा बढ़ेगा, शिपिंग में देरी होगी और बीमा लागत भी बढ़ेगी। इससे प्रदेश के निर्यातकों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा। अमेरिका और ईरान के बीच गंभीर संघर्ष की स्थिति में इसका असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और व्यापार मार्गों के माध्यम से उत्तर प्रदेश तक पहुंच सकता है।
पब्लिक पालिसी रणनीतिकार हसन याकूब के अनुसार भारत लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसमें बड़ा हिस्सा स्ट्रेट आफ होर्मुज से होकर गुजरता है। यदि इस मार्ग में किसी प्रकार की बाधा आती है तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसका असर नोएडा, कानपुर, मेरठ और लखनऊ जैसे औद्योगिक केंद्रों में उत्पादन और लाजिस्टिक्स लागत पर पड़ेगा। प्रदेश के निर्यात आधारित उद्योग भी इस संकट से प्रभावित हो सकते हैं। इनमें कानपुर और आगरा का लेदर व फुटवियर उद्योग, मुरादाबाद का पीतल हस्तशिल्प, भदोही का कालीन उद्योग तथा नोएडा और वाराणसी के वस्त्र व परिधान उद्योग प्रमुख हैं।
कृषि क्षेत्र पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि यूरिया और अमोनिया जैसे उर्वरकों के कई कच्चे इनपुट मध्य पूर्व की आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़े हुए हैं। खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता का असर उत्तर प्रदेश के पर्यटन कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। अनुमान है कि अब तक 500 से 700 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो चुका है। आगरा स्थित ट्रैवेल एजेंसी फर्म ट्रैवेल पैशन के मैनेजिंग पार्टनर माधव कटारा ने बताया कि उनके यहां 90 प्रतिशत से अधिक बुकिंग रद्द हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि 14 मार्च से ब्रिटिश समूह के लिए बुकिंग थी, जिसे रद्द करना पड़ा।
पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार इटली को छोड़कर अधिकांश विदेशी पर्यटक अक्तूबर से मार्च के बीच भारत आते हैं, लेकिन वर्तमान हालात के कारण कई पर्यटक अपनी यात्रा योजना रद्द कर रहे हैं। पारसी नववर्ष नवरोज के दौरान बड़ी संख्या में ईरानी पर्यटक आगरा और वाराणसी आते हैं, लेकिन इस बार उनके आने की संभावना बेहद कम बताई जा रही है। वाराणसी में अप्रूव्ड टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन के पूर्व महासचिव संजय गुप्ता के अनुसार जब विदेशी पर्यटकों की बुकिंग रद्द हो रही है तो गाइड समुदाय को भी सीधा नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि अशांति का दौर लंबा चला तो जुलाई और अगस्त में आने वाले यूरोपीय पर्यटकों की संख्या भी प्रभावित हो सकती है।






