हल्द्वानी बेदखली मामला में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा निर्देश देते हुए कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि अतिक्रमणकारी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र हैं या नहीं। कोर्ट ने उत्तराखंड विधिक सेवा प्राधिकरण को शिविर लगाने का आदेश दिया है, ताकि प्रभावित परिवार पुनर्वास के लिए आवेदन कर सकें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया 31 मार्च से पहले पूरी की जाए और पात्रता की रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेलवे परियोजना के लिए आवश्यक सरकारी जमीन पर रह रहे परिवारों को योजना के तहत आवेदन का अवसर दिया जाए।
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शिविर 15 मार्च के बाद लगाया जाएगा, क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने रमजान के बाद आयोजन की मांग की थी।
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राजस्व प्राधिकरण, केंद्र और राज्य सरकार मिलकर 19 मार्च से एक सप्ताह का शिविर आयोजित करेंगे।
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बनभूलपुरा में पुनर्वास केंद्र बनाया जाएगा।
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जिला कलेक्टर हर परिवार की पात्रता तय कर रिपोर्ट अदालत में पेश करेंगे।
नैनीताल के जिलाधिकारी और एसडीएम हल्द्वानी को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह मामला दिसंबर 2022 में उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं से जुड़ा है, जिसमें हल्द्वानी में कथित अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे। जनवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसे समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा है।
रेलवे की लगभग 30 हेक्टेयर जमीन पर बनभूलपुरा, गफूर बस्ती सहित अन्य क्षेत्रों में अवैध निर्माण हैं, जहां अनुमानित 5,000 से अधिक परिवार (करीब 50,000 लोग) रह रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमण करने वालों को यह अधिकार नहीं है कि वे उसी स्थान पर रहने की मांग करें या रेलवे की जमीन के उपयोग पर निर्णय लें। साथ ही, सामाजिक कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर योजना के बारे में जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सभी पात्र परिवार आवेदन कर सकें।
रेलवे ने कहा कि ट्रैक विस्तार और अन्य परियोजनाओं के लिए इस जमीन की सख्त जरूरत है। नदी के कारण मौजूदा ट्रैक में दिक्कत आ रही है और उत्तराखंड में विस्तार के लिए यह अंतिम संभावित क्षेत्र है। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि पात्र परिवारों को विस्थापन के बाद छह महीने तक प्रति माह 2,000 रुपए का भत्ता दिया जाएगा। केंद्र ने बताया कि 13 जमीनों पर फ्रीहोल्ड है और मुआवजा राज्य व रेलवे मिलकर देंगे। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने अदालत में कहा कि लगभग 50 हजार लोग दशकों से यहां रह रहे हैं, कई पट्टे वाली जमीन पर बसे हैं और रेलवे ने पहले कभी मांग नहीं की।
उन्होंने पास की खाली जमीन के उपयोग का सुझाव देते हुए कहा कि एक साथ इतने परिवारों को योजना के तहत आवास देना व्यावहारिक चुनौती है। मामले की अगली सुनवाई अप्रैल 2026 में होगी। तब तक रेलवे जमीन से अतिक्रमण हटाने की कोई कार्रवाई नहीं करेगा। हल्द्वानी बेदखली मामला अब पुनर्वास और पात्रता जांच के चरण में पहुंच गया है, जहां अदालत की निगरानी में आगे की प्रक्रिया तय होगी।





