बेंच की मांग को लेकर शहर की सड़कों पर उतरे उत्साही अधिवक्ताओं ने कराया खुला बाजार बंद, दिखा मिला-जुला असर
मुजफ्फरनगर। पश्चिम उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की वर्षों पुरानी मांग को लेकर अधिवक्ताओं का आंदोलन एक बार फिर सड़कों पर गहरा होता नजर आया। हाईकोर्ट बेंच के लिए आंदोलनरत केन्द्रीय संघर्ष समिति के आह्वान पर बुधवार को इसे जनांदोलन का रूप देने के उद्देश्य से पश्चिम यूपी के सभी जिलों में बाजार बंद का आह्वान किया गया। जहां अनेक जिलों में बंद का व्यापक असर दिखाई दिया, वहीं मुजफ्फरनगर में यह आंदोलन पूरी तरह प्रभावी साबित नहीं हो सका। कचहरी में वकीलों के चैंबर पूरी तरह से बंद रहे, लेकिन शहर के बजारों में जोर जबरदस्ती का बंद नजर आया। शीतलहार के बावजूद अधिवक्ता पूरे उत्साह और जोश के साथ सड़कों पर उतरे और उनको बाजार बंदी के लिए व्यापारियों का मान मनौवल कराना पड़ा तो जबरन शटर भी गिराये गये।

पश्चिम उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर संघर्षरत केन्द्रीय संघर्ष समिति के आह्वान पर बुधवार को जिला बार संघ और सिविल बार एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ताओं ने बाजार बंद कराकर आंदोलन को तेज करने का प्रयास किया। भीषण शीतलहर के बीच अधिवक्ता कहचरी में अपने सभी चैंबरों को बंद करते हुए प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतरे और हाईकोर्ट बेंच को पश्चिम यूपी में स्थापित किए जाने की मांग को जनहित का मुद्दा बताते हुए बाजारों में घूम-घूमकर आम आदमी का समर्थन जुटाने का प्रयास किया।

पश्चिम उत्तर प्रदेश के कई जिलों में जहां बाजार बंद रहने की खबरें आती रहीं, वहीं मुजफ्फरनगर में शहर के बाजारों में सामान्य चहल-पहल देखने को मिली। बाजार खुले रहने पर अधिवक्ताओं ने आंदोलन को असरदार बनाने के लिए स्वयं बाजारों में उतरकर दुकानदारों से बंदी की अपील की। जिला बार एसोसिएशन और सिविल बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के नेतृत्व में अधिवक्ताओं की टोलियां शहर के विभिन्न बाजारों में घूमती रहीं।

अधिवक्ताओं ने मीनाक्षी चौक, शिव चौक, प्रकाश चौक, सिटी सेंटर, दाल मंडी, पान मंडी, सर्राफा बाजार, लोहिया बाजार, भगत सिंह रोड, एसडी मार्केट, मोलाहेड़ी मार्केट, शिव मार्केट और तहसील मार्केट में पहुंचकर दुकानों को बंद कराने का प्रयास किया। कई स्थानों पर अधिवक्ताओं ने हाथ जोड़कर दुकानदारों से सहयोग की अपील की, जबकि कुछ जगहों पर विरोध के बावजूद शटर जबरन बंद कराए गए और ठेले-खोमचे हटवाए गए। इससे शहर में यह बाजार बंद कहीं-कहीं जबरदस्ती के बंद का रूप लेता दिखाई दिया। पान मंडी सहित कुछ बाजारों में दुकानदारों ने बंदी से साफ इनकार कर दिया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालांकि कई व्यापारी अधिवक्ताओं की भीड़ को देखकर कुछ देर के लिए दुकानें बंद करने को तैयार हुए, लेकिन कुछ समय बाद बाजारों में फिर से रौनक लौट आई। व्यापारियों का कहना था कि मंगलवार की साप्ताहिक बंदी के बाद बुधवार को बाजार खुलता है, ऐसे में दो दिन लगातार बंद रखना उनके लिए नुकसानदायक है।

इस आंदोलन के दौरान हिंदूवादी संगठनों, व्यापारी संगठनों एवं अन्य सामाजिक संगठनों का समर्थन भी जमीन पर नजर नहीं आया। जो व्यापारी नेता पूर्व में बार संघ कार्यालय पहुंचकर समर्थन जताते दिखे थे, वे बाजार बंद कराने के दौरान सड़कों पर दिखाई नहीं दिए। अधिवक्ताओं ने शिव चौक पर सड़कों पर बैठकर प्रदर्शन किया और जोरदार नारेबाजी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट बेंच की स्थापना केवल अधिवक्ताओं का नहीं, बल्कि आम जनता का मुद्दा है, जिससे पश्चिम उत्तर प्रदेश के लोगों को सस्ती और सुलभ न्याय व्यवस्था मिल सके। कुल मिलाकर मुजफ्फरनगर में अधिवक्ताओं का बाजार बंद आंशिक और मिला-जुला असर छोड़ता नजर आया, लेकिन आंदोलन को जनांदोलन बनाने के लिए वकीलों का उत्साह और संघर्ष साफ दिखाई दिया।






