होर्मुज स्ट्रेट में नया रूट, भारत पर दबाव घटने के संकेत

होर्मुज स्ट्रेट में चार बड़े जहाजों की आवाजाही ने भारत के लिए राहत का एक संकेत दिया है। शिप-ट्रैकिंग डेटा बताता है कि तेल, एलएनजी और सामान्य माल ले जाने वाले जहाज ओमान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र के भीतर बने एक वैकल्पिक रास्ते से आगे बढ़े हैं। इससे यह उम्मीद बनी है कि पश्चिम एशिया के तनाव के बीच समुद्री सप्लाई पर बना दबाव थोड़ा नरम पड़ सकता है।

मामला इसलिए बड़ा है, क्योंकि दुनिया के तेल और एलएनजी का करीब पांचवां हिस्सा इसी समुद्री गलियारे से गुजरता है। पिछले हफ्तों में यहां रुकावट ने सिर्फ वैश्विक बाजार नहीं हिलाया, बल्कि भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों की चिंता भी बढ़ा दी थी।

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होर्मुज स्ट्रेट नया रास्ता कैसे दिखा

शिपिंग डेटा के अनुसार, मार्शल द्वीप समूह के ध्वज वाले हब्रुत और धलकुट नाम के दो बड़े कच्चा तेल टैंकर, पनामा ध्वज वाला सोहार एलएनजी, और एक भारतीय ध्वज वाला मालवाहक जहाज इस रूट पर दर्ज हुए। यह रास्ता सामान्य अंतरराष्ट्रीय मार्ग से हटकर ओमान की समुद्री सीमा के भीतर दिखाई दिया। कुछ जहाजों ने पार करते समय अपना AIS सिग्नल भी बंद किया, जो इस पूरे मूवमेंट को और अहम बनाता है।

डेटा के मुताबिक, हब्रुत और धलकुट भारी मात्रा में कच्चा तेल लेकर निकले थे। सोहार एलएनजी की लोडिंग को लेकर पूरी स्पष्टता नहीं है, जबकि भारतीय जहाज MSV Quba MNV 2183 के बारे में भी यह साफ नहीं है कि वह पूरी तरह माल से लदा था या उसकी अंतिम मंजिल क्या थी। यही वजह है कि इस घटनाक्रम को राहत का संकेत तो माना जा रहा है, लेकिन इसे पूरी बहाली नहीं कहा जा सकता।

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भारत के लिए राहत क्यों, लेकिन पूरी राहत नहीं

भारत के लिए सबसे अहम बात यह है कि सरकार पहले ही अपनी कच्चे तेल की सप्लाई को काफी हद तक विविध कर चुकी है। आधिकारिक ब्रीफिंग के अनुसार, अब भारत के करीब 70% कच्चे तेल आयात ऐसे रास्तों से आ रहे हैं जो होर्मुज पर निर्भर नहीं हैं। सरकार ने यह भी कहा है कि देश के पास कच्चे तेल और ईंधन की मांग पूरी करने लायक कई हफ्तों का सुरक्षित स्टॉक है।

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लेकिन तस्वीर का दूसरा हिस्सा ज्यादा संवेदनशील है। भारत अपनी करीब 60% एलपीजी जरूरत आयात से पूरी करता है, और इन आयातों का लगभग 90% हिस्सा होर्मुज से जुड़ा है। यानी जहाजों का यह नया रास्ता खुलना राहत जरूर देता है, मगर रसोई गैस और गैस सप्लाई का जोखिम अभी खत्म नहीं हुआ।

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