पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान पर अमेरिका तथा इस्राइल के हमलों के बीच देश में ईंधन की कमी को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी गईं। इसी बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में तेल भंडार पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और फिलहाल घबराने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार के अनुसार देश के पास 25 करोड़ बैरल (करीब 4,000 करोड़ लीटर) कच्चा तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का संयुक्त भंडार मौजूद है, जो देश की जरूरतों को लगभग 7 से 8 सप्ताह यानी 50 से 60 दिन तक पूरा कर सकता है।
भारत ने अपने तेल भंडार को एक ही स्थान पर रखने के बजाय पूरे देश में रणनीतिक रूप से फैलाकर रखा है। इसके लिए कई महत्वपूर्ण स्थानों पर विशेष भंडारण सुविधाएं बनाई गई हैं। मुख्य रणनीतिक भंडारण केंद्र: मैंगलोर पादुर विशाखापत्तनम इन स्थानों पर भूमिगत भंडारण टैंक बनाए गए हैं, जहां बड़ी मात्रा में कच्चा तेल सुरक्षित रखा जाता है। इसके अलावा रिफाइनरियों और डिपो में भी विशाल टैंकों में ईंधन का भंडारण किया गया है।
भारत के पास केवल स्टोर किया हुआ तेल ही नहीं है, बल्कि हजारों किलोमीटर लंबी पाइपलाइनों में लगातार प्रवाहित हो रहा तेल भी आपूर्ति का हिस्सा है। इसके अलावा समुद्र में कई बड़े तेल टैंकर भारतीय बंदरगाहों की ओर आ रहे हैं। देश के पास केवल कच्चा तेल ही नहीं बल्कि तैयार उत्पादों का भी पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिनमें शामिल हैं: पेट्रोल, डीजल, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (विमान ईंधन), एलपीजी, एलएनजी सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रहे दो बड़े दावों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है। पहला दावा यह था कि वैश्विक तेल आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई है।
दूसरा दावा यह किया जा रहा था कि भारत के पास केवल 25 दिनों का तेल भंडार बचा है। हालांकि सरकार के अनुसार भारत अभी भी रूस, इराक और यूएई जैसे कई वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं से लगातार तेल प्राप्त कर रहा है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराहट में आकर पेट्रोल और डीजल का अनावश्यक भंडारण न करें। देश की आपूर्ति श्रृंखला सामान्य रूप से काम कर रही है और फिलहाल किसी तरह की कमी की स्थिति नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत की ऊर्जा कूटनीति और रणनीतिक तेल भंडारण नीति ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बावजूद देश को एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान किया है।






