दुबई में फंसे भारतीय इन दिनों भारी दहशत और अनिश्चितता के बीच जिंदगी गुजार रहे हैं। ईरान-इजरायल युद्ध के बीच अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद खाड़ी देशों में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। आसमान से गिरती मिसाइलों और धमाकों की गूंज ने वहां काम कर रहे लाखों भारतीयों की नींद उड़ा दी है। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के रटौल गांव का रहने वाला दानिश किसी तरह अपनी जान बचाकर दुबई से ओमान पहुंचा है।
उसने वीडियो कॉल के जरिए वहां के हालात बताते हुए कहा कि हालात बेहद डरावने हो चुके हैं। दानिश ने बताया कि दुबई जैसे सुरक्षित माने जाने वाले शहरों में भी अब मिसाइल गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। लगातार हो रहे धमाकों से स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ वहां रह रहे प्रवासी मजदूर और नौकरीपेशा लोग भी बेहद डरे हुए हैं। युद्ध के कारण दुबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ानों का संचालन भी प्रभावित हो गया है। लोग किसी भी तरह अपने देश लौटना चाहते हैं, लेकिन परिवहन के साधन बेहद सीमित हो गए हैं।
दुबई में फंसे भारतीयों के बीच अफरातफरी के हालात हैं। दानिश ने बताया कि वह सड़क मार्ग से बस के जरिए दुबई से ओमान पहुंचा। ओमान एयरपोर्ट पर इस समय हजारों भारतीय और अन्य देशों के नागरिकों की भारी भीड़ जमा है। दुबई से उड़ानें नहीं मिलने के कारण ओमान ही अब वतन वापसी का एक बड़ा विकल्प बन गया है। युद्ध के हालात के बीच विमान कंपनियों ने टिकटों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। दानिश के मुताबिक भारत आने वाली इक्का-दुक्का उड़ानों का किराया तीन से चार गुना तक बढ़ चुका है।
उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी ने करीब 80 हजार रुपये का टिकट कराया है, जो सामान्य दिनों में काफी कम कीमत पर मिल जाता था। एयरपोर्ट पर कई ऐसे लोग भी हैं जिनके पास पैसे खत्म हो चुके हैं और वे भारत सरकार की मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं। दानिश किसी तरह ओमान पहुंच गया है, लेकिन रटौल गांव के कई अन्य युवक अभी भी खाड़ी देशों के अलग-अलग हिस्सों में फंसे हुए हैं। इनमें सलाउद्दीन, शाजिल, राशिद, जीशान, रियाजुद्दीन और साजिद के नाम सामने आए हैं।
बागपत में उनके परिवार बेहद चिंतित हैं। परिजन दिन-रात टीवी और फोन से जुड़े हुए हैं और लगातार उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं। परिजनों ने भारत सरकार से मांग की है कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए जल्द विशेष राहत अभियान शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि पहले भी संकट के समय भारत सरकार ने विदेशों में फंसे नागरिकों को निकालने के लिए बड़े अभियान चलाए हैं, इसलिए इस बार भी जल्द कदम उठाने की जरूरत है ताकि हजारों भारतीय सुरक्षित अपने घर लौट सकें।






