प्रयागराज। मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम स्नान के लिए पहुंचे ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का रथ पुलिस और मेला प्रशासन ने संगम तट से पहले ही रोक दिया। जुलूस के साथ आगे बढ़ने की अनुमति न मिलने पर मौके पर मौजूद साधु-संतों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हो गई, जिससे संगम क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया।
पुलिस प्रशासन का कहना था कि सुरक्षा कारणों से जुलूस के साथ संगम तट तक जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती और शंकराचार्य केवल सीमित संख्या में सहयोगियों के साथ ही स्नान कर सकते हैं। इस पर शंकराचार्य ने आपत्ति जताते हुए पुलिस और मेला प्रशासन पर मनमाने रवैये का आरोप लगाया।
पुलिस से झड़प की सूचना मिलते ही वायरलेस अलर्ट जारी किया गया, जिसके बाद भारी संख्या में पुलिस बल संगम तट पर तैनात कर दिया गया। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार और मेलाधिकारी ऋषिराज समेत कई वरिष्ठ अधिकारी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पहुंचे।
घटना के बाद शंकराचार्य के समर्थकों में नाराजगी फैल गई। पुलिस ने हालात बिगड़ने से रोकने के लिए 20 से अधिक साधु-संतों को हिरासत में ले लिया। वहीं, कुछ समर्थकों द्वारा पांटून पुल संख्या चार के पास बैरिकेडिंग को नुकसान पहुंचाने की भी सूचना है।
तनावपूर्ण हालात के बीच संगम घाटों पर आम श्रद्धालुओं का स्नान जारी है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने समर्थकों के साथ संगम पहुंचने से पहले ही बैठ गए और पुलिस प्रशासन के निर्णय के खिलाफ विरोध जताया। जैसे-जैसे समर्थकों की संख्या बढ़ रही है, प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है।
फिलहाल पुलिस अधिकारी शंकराचार्य और उनके समर्थकों को समझाने-बुझाने में जुटे हैं। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।






