नोएडा स्कूल मान्यता रद्द होने से सेक्टर 56 स्थित उत्तराखंड पब्लिक स्कूल में पढ़ रहे करीब 1500 छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने गंभीर शिकायतों की जांच के बाद स्कूल की मान्यता समाप्त करने का निर्णय लिया है। बोर्ड के अनुसार कार्रवाई विस्तृत जांच के बाद की गई है। स्कूल के शिक्षकों और कर्मचारियों ने प्रशासन के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे।
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मानसिक उत्पीड़न
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वेतन में कटौती
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गलत व्यवहार
इन शिकायतों की जांच के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक और सिटी मजिस्ट्रेट की संयुक्त कमेटी बनाई गई थी। जांच रिपोर्ट में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद बोर्ड ने मान्यता रद्द करने का फैसला लिया।
नोएडा स्कूल मान्यता रद्द होने के बाद बोर्ड ने छात्रों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं
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स्कूल में नए एडमिशन पर रोक रहेगी।
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कक्षा 9वीं और 11वीं के छात्रों को प्रमोट नहीं किया जाएगा।
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10वीं और 12वीं के छात्र 2025-26 सत्र पूरा कर सकेंगे और बोर्ड परीक्षा दे सकेंगे।
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9वीं और 11वीं के छात्रों को 31 मार्च तक दूसरे सीबीएसई स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाएगा।
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कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों पर फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
सीबीएसई के नियमों के तहत ऐसी अनियमितताओं पर कार्रवाई की जाती है। हालांकि यह हमेशा के लिए प्रतिबंध नहीं होता।
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दो वर्षों तक स्कूल दोबारा मान्यता के लिए आवेदन नहीं कर सकेगा।
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दो वर्ष बाद सशर्त आवेदन किया जा सकता है।
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शर्त होगी कि भविष्य में दोबारा ऐसी अनियमितताएं न हों।
फिलहाल अभिभावकों और छात्रों के बीच असमंजस की स्थिति है। प्रशासनिक स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। नोएडा स्कूल मान्यता रद्द होने का यह मामला निजी स्कूलों की जवाबदेही और पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।





