देवबंद। श्री रामकृष्ण सेवा सदन चैरिटेबल ट्रस्ट परिसर में पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के तत्वावधान में साध्वी आशु गिरी के महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक समारोह का भव्य आयोजन किया गया। वैदिक विधि-विधान और अखाड़ा परंपरा के अनुसार संपन्न हुए इस धार्मिक अनुष्ठान में देशभर से आए साधु-संतों, विद्वान आचार्यों और बड़ी संख्या में सनातन धर्मावलंबी श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
समारोह के दौरान अखाड़े के प्रतिनिधियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच चादर विधि संपन्न कर साध्वी आशु गिरी को प्रतिष्ठित श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े का महामंडलेश्वर घोषित किया। इसके पश्चात पुष्प वर्षा कर उन्हें अखाड़ा परंपरा के अनुरूप सम्मानित किया गया।
अखाड़ा परंपरा में महामंडलेश्वर का पद सनातन धर्म में त्याग, तपस्या, साधना और गुरु कृपा का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है। यह केवल धार्मिक सम्मान नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा, समाज को मार्गदर्शन देने और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का महत्वपूर्ण दायित्व भी होता है।
पट्टाभिषेक के पश्चात महामंडलेश्वर पद पर आसीन साध्वी आशु गिरी ने इसे अपने जीवन का गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि पंचायती निरंजनी अखाड़े द्वारा उन्हें यह दायित्व सौंपा जाना उनके लिए अत्यंत सम्मान की बात है। उन्होंने अखाड़े की परंपराओं को आगे बढ़ाने और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करने का संकल्प लिया।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने कहा कि निरंजनी अखाड़े से जुड़े युवा, ऊर्जावान और दिव्य संत समाज और हिंदू समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि अगली धर्म संसद जापान में आयोजित की जाएगी, जिसके लिए शीघ्र ही अखाड़े का एक शिष्टमंडल जापान रवाना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा सदैव समाज निर्माण और मानव सेवा के कार्यों में अग्रणी रहा है।
समारोह के दौरान संत समाज ने हर-हर महादेव के जयकारों के साथ महामंडलेश्वर साध्वी आशु गिरी का तिलक कर, चादर ओढ़ाकर सम्मान किया। पूरा परिसर धार्मिक उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत नजर आया। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन ममता वर्मा द्वारा किया गया।






