कहा-2025 के मुकाबले 2026 में 63 लाख मीट्रिक टन गन्ना सप्लाई कम, दो लाख चीनी उत्पादन घटा, चिंतन करने पर दिया जोर
मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश में गन्ना उत्पादन में आई गिरावट ने किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर डाला है। ताज़ा आंकड़ों के हवाले से दावा किया गया है कि वर्ष 2026 में गन्ना आपूर्ति और चीनी उत्पादन में कमी के कारण किसानों को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेन्द्र मलिक ने एक डाटा प्रस्तुत करते हुए कहा है कि चालू वर्ष में गन्ना किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। उनके अनुसार, गन्ना उत्पादन में कमी के चलते वर्ष 2025 के मुकाबले किसानों को करीब 2500 करोड़ रुपये कम प्राप्त हुए हैं, जबकि वर्ष 2026 में चीनी उत्पादन भी लगभग दो लाख मीट्रिक टन घटा है।
किसान नेता धर्मेन्द्र मलिक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी अपनी एक वीडियो पोस्ट में 15 अप्रैल तक के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2025 में इस अवधि तक 937 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई उत्तर प्रदेश की शुगर मिलों में हुई थी, जबकि वर्ष 2026 में यह घटकर 843 लाख मीट्रिक टन रह गई। इस प्रकार लगभग 63 लाख मीट्रिक टन गन्ने की आपूर्ति में कमी आई, जिससे किसानों को करीब 2500 करोड़ रुपये का भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। उन्होंने इस गिरावट के पीछे मुख्य कारणों में उन्नत किस्मों का अभाव और कीट प्रबंधन की उचित व्यवस्था न होना बताया। मलिक ने कहा कि इन समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में किसानों को ऐसे नुकसान से बचाया जा सके।
उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि ऐसे में चीनी मिलों के लिए कुछ राहत की स्थिति भी सामने आई है। कम गन्ना उत्पादन के बावजूद रिकवरी दर में सुधार हुआ है। पिछले वर्ष जहां रिकवरी 9.70 प्रतिशत थी, वहीं इस वर्ष यह बढ़कर 10.20 प्रतिशत हो गई है। चीनी उत्पादन के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2025 में 15 अप्रैल तक 91.10 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन हुआ था, जो वर्ष 2026 में घटकर 89.27 लाख मीट्रिक टन रह गया। यानी कुल मिलाकर लगभग दो लाख मीट्रिक टन की कमी दर्ज की गई है। धर्मेन्द्र मलिक ने किसानों से इस स्थिति पर गंभीर चिंतन करने और खेती में सुधार के उपाय अपनाने की अपील की है, ताकि आने वाले समय में उत्पादन और आय दोनों को संतुलित किया जा सके।






