अपराधी के आर्थिक नेटवर्क पर की गई गहरी चोट, बरेली और शाहजहांपुर में स्थित 34 चल व अचल संपत्तियां सील
मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर पुलिस ने नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ बड़ी और निर्णायक कार्रवाई करते हुए एक कुख्यात मादक पदार्थ तस्कर की के खिलाफ उसके ही गढ़ में जाकर कानून के राज का एक ऐसा संदेश दिया, जिसने इस जिले की पुलिस को यूपी में नंबर वन तो बनाया है, उत्तर भारत की बड़ी कार्रवाईयों में भी जिला पुलिस ने नाम कमाकर रिकॉर्ड बनाया है। एसएसपी ने दावा किया है कि यह कार्रवाई यूपी का सबसे बड़ा एक्शन होने के साथ ही उत्तर भारत की बड़ी कार्रवाईयों में शुमार हो गई है।

जनपद मुजफ्फरनगर में आॅपरेशन सवेरा अभियान के तहत पुलिस ने नशे के अवैध कारोबार पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए एक बड़े तस्कर की 80 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त कर ली। यह कार्रवाई एनडीपीएस एक्ट के तहत की गई है और इसे उत्तर प्रदेश में संपत्ति जब्तीकरण की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार, आरोपी बाबू उर्फ रियाज उर्फ असफाक निवासी बरेली लंबे समय से मादक पदार्थों की तस्करी में सक्रिय था और उसने अवैध तरीके से करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की थी। आरोपी के खिलाफ दिल्ली, बरेली, शाहजहांपुर और मुजफ्फरनगर में एनडीपीएस एक्ट समेत 11 गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं, जिससे उसका आपराधिक इतिहास भी काफी लंबा और गंभीर है।
आॅपरेशन सवेरा के तहत पुलिस ने पहले आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से भारी मात्रा में स्मैक बरामद की थी। इसके बाद विस्तृत जांच में सामने आया कि आरोपी ने नशे के कारोबार से अर्जित धन से अपने और परिजनों के नाम पर बड़े पैमाने पर संपत्तियां खरीदी थीं। इनमें कृषि भूमि, प्लॉट, आलीशान मकान, चार मंजिला कॉम्प्लेक्स, बिल्डिंग मैटेरियल शोरूम, ईंट भट्टे, वाहन और अन्य चल-अचल संपत्तियां शामिल हैं। एसएसपी संजय वर्मा के निर्देशन में गठित टीम ने इन संपत्तियों की गहन जांच कर 34 संपत्तियों को चिन्हित किया, जिनकी कुल कीमत 80 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई।
एनडीपीएस एक्ट की धारा 68 के तहत सक्षम प्राधिकारी के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। साक्ष्यों के आधार पर 24 मार्च 2026 को सभी संपत्तियों को जब्त करने के आदेश जारी किए गए। पुलिस ने 26 और 27 मार्च को शाहजहांपुर और बरेली में स्थित इन संपत्तियों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें विधिवत जब्त कर लिया। आरोपी शाहजहांपुर का हिस्ट्रीशीटर अपराधी भी बताया गया है, जिसने वर्षों से नशे के कारोबार के जरिए अपना नेटवर्क खड़ा किया था। बाबू पर पहला मुकदमा साल 2017 में दर्ज किया गया था। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि अब अपराधियों की घोषित एवं बेनामी अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति सुरक्षित नहीं रहेगी।






