नई दिल्ली: सोमवार को भारत पहुंचे संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की यात्रा भले ही समय में बेहद सीमित रही, लेकिन इसके राजनीतिक और कूटनीतिक मायने लंबे समय तक चर्चा में रहने वाले हैं। महज ढाई घंटे के इस दौरे ने यह साफ कर दिया कि भारत और यूएई के रिश्ते अब औपचारिक शिष्टाचार से आगे निकल चुके हैं और रणनीतिक भरोसे की नई जमीन पर खड़े हैं।
कूटनीतिक हलकों में इस यात्रा को “लो-प्रोफाइल, हाई-इम्पैक्ट विज़िट” के तौर पर देखा जा रहा है। आमतौर पर विस्तृत कार्यक्रमों और बड़े प्रतिनिधिमंडलों के साथ होने वाली विदेश यात्राओं के उलट, यह मुलाकात सीमित समय और सीमित एजेंडे के बावजूद कई अहम संकेत छोड़ गई।
कम समय, ज्यादा संदेश: क्यों खास रही यह यात्रा
जानकारों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शेख मोहम्मद बिन जायद के बीच बनी व्यक्तिगत समझ इस दौरे की सबसे बड़ी वजह रही। दोनों नेताओं के बीच सीधा संवाद और आपसी विश्वास इस स्तर तक पहुंच चुका है कि कई मुद्दों पर लंबी बैठकों के बजाय संक्षिप्त बातचीत ही पर्याप्त मानी जा रही है।
इस मुलाकात में औपचारिक घोषणाओं से ज्यादा रणनीतिक दिशा पर जोर दिया गया, ताकि भविष्य के फैसलों के लिए साझा सोच बनाई जा सके।
पश्चिम एशिया पर नजर: शांति पहल पर मंथन
सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता, खासकर गाजा को लेकर संभावित शांति पहलों पर विचार हुआ। अमेरिका की ओर से प्रस्तावित एक अंतरराष्ट्रीय शांति मंच को लेकर भारत और यूएई के बीच भूमिका और तालमेल पर चर्चा की गई।
यूएई पहले से इस पहल में सक्रिय भूमिका निभा रहा है, जबकि भारत को भी इसमें भागीदारी के लिए आमंत्रित किया गया है। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय संतुलन और स्थिरता बनाए रखने के विकल्पों पर विचार साझा किया।
ऊर्जा और निवेश: भरोसे की साझेदारी
बैठक में ऊर्जा सुरक्षा और निवेश सहयोग भी अहम मुद्दा रहा। यूएई भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण कार्यक्रम में एक प्रमुख साझेदार है और आने वाले वर्षों में रिन्यूएबल एनर्जी व इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि यह सहयोग केवल आर्थिक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक जरूरतों से जुड़ा है।
भारत की वैश्विक स्थिति का संकेत
शेख मोहम्मद बिन जायद जैसे प्रभावशाली नेता का कुछ घंटों के लिए भारत आना, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती अहमियत की ओर इशारा करता है। विदेश नीति से जुड़े जानकारों के मुताबिक, यह यात्रा दर्शाती है कि वैश्विक फैसलों में भारत को अब केवल एक उभरती शक्ति नहीं, बल्कि स्थिर और भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखा जा रहा है।
रिश्ते जो व्यापार से आगे बढ़े
भारत और यूएई के संबंध अब सिर्फ ऊर्जा और श्रम आधारित नहीं रहे। बीते कुछ वर्षों में दोनों देशों ने सुरक्षा, तकनीक, निवेश और संस्कृति के क्षेत्रों में भी सहयोग को विस्तार दिया है।
यूएई में रहने वाला बड़ा भारतीय समुदाय, हाल ही में बना भव्य हिंदू मंदिर और आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति—ये सभी पहल दोनों देशों के रिश्तों को एक मजबूत सामाजिक और रणनीतिक आधार देती हैं।
यूएई में भारतीय समुदाय की भूमिका
यूएई में भारतीय समुदाय न केवल संख्या में बड़ा है, बल्कि वहां की अर्थव्यवस्था और समाज का अहम हिस्सा भी है। दुबई, अबू धाबी और शारजाह जैसे शहरों में लाखों भारतीय विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं और हर साल बड़ी मात्रा में रेमिटेंस भारत भेजते हैं।
व्यापार और निवेश में नई ऊंचाई
भारत-यूएई व्यापार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते के बाद व्यापारिक लेन-देन में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। यूएई का निवेश भारत के बंदरगाह, सड़क, डिजिटल और ऊर्जा क्षेत्रों में तेजी से बढ़ा है।
बदलती वैश्विक राजनीति में साझा राह
कुल मिलाकर, शेख मोहम्मद बिन जायद की यह संक्षिप्त यात्रा इस बात का संकेत है कि वैश्विक राजनीति के बदलते समीकरणों में भारत और यूएई अब साथ-साथ कदम बढ़ा रहे हैं। यह दौरा किसी बड़े मंच से किए गए भाषण के बजाय, शांत लेकिन ठोस रणनीतिक संदेश देकर समाप्त हुआ।






