अधिवक्ता संशोधन बिल के विरोध में कचहरी में वकीलों ने निकाली रैली

मुजफ्फरनगर। केंद्र सरकार द्वारा लाये जा रहे अधिवक्ता संशोधन बिल के विरोध में देश भर में उठ रहे विरोध के स्वर शुक्रवार को जिला कचहरी में भी सुनाई दिये। यहां पर बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के आह्नन पर प्रदेश व्यापारी आंदोलन की कड़ी में बार संघ ने नो वर्क किया और अधिवक्ताओं ने सरकार से ये निर्णय वापस लेने की मांग करते हुए हाथों पर काली पट्टी बांधकर जुलूस निकालते हुए डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा। कचहरी में अधिवक्ताओं का नो वर्क होने के कारण न्यायिक विभाग में कामकाज भी प्रभावित रहा और वादकारियों को भी निराश होकर वापस लौटना पड़ा।

केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता अधिनियम 1961 में बड़ा बदलाव करने की तैयारी की है। इस बदलाव के लिए सरकार अधिवक्ता संधोधन बिल 2025 ला रही है। इसमें कई नये प्रावधान किये गये हैं। सरकार के इस निर्णय को बार और बेंच के हितों के खिलाफ बताते हुए अधिवक्ता पूरे देश में प्रदर्शन कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में भी इसके लिए बड़ा आंदोलन किया जा रहा है। शुक्रवार को भी प्रदेश में अधिवक्ताओं ने इसके विरोध में सांकेतिक प्रदर्शन कर कार्य बहिष्कार किया। आज सवेरे जिला बार संघ के अध्यक्ष ठा. कुंवर पाल सिंह और महासचिव चन्द्रवीर सिंह निर्वाल तथा सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील मित्तल और महासचिव राज सिंह रावत के नेतृत्व में दोनो बार के सदस्य अधिवक्ता एकत्र हुए और हाथों पर काली पट्टी बांधकर कचहरी परिसर में अधिवक्ता संशोधन बिल के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला।

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बाद में यह जुलूस जिलाधिकारी कार्यालय पर पहुंचकर समाप्त हुआ और यहां पर राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन जिलाधिकारी उमेश मिश्रा को सौंपा गया। बार संघ अध्यक्ष ठा. कुंवर पाल ने बताया कि बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के आह्नान पर शुक्रवार को प्रदेशव्यापी आंदोलन किया गया। इस दौरान सभी जनपदों में अधिवक्ता संशोधन बिल के खिलाफ प्रदर्शन किये गये हैं। इसी कड़ी में आज कचहरी में नो वर्क करते हुए अधिवक्ताओं ने जुलूस निकालकर अपना रोष प्रकट किया है। ज्ञापन के बाद बार संघ के आह्नान पर आंदोलन की रणनीति बनाने के लिए फैंथम हॉल में अधिवक्ताओं की मीटिंग का आयोजन किया गया। इसमें बार पदाधिकारियों ने कहा कि केंद्र सरकार अधिवक्ता अधिनियम 1961 को बदलने जा रही है, नया कानून लाया जा रहा है, जिसमें अधिवक्ताओं के हितों के खिलाफ प्रावधान किये गये हैं।

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वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि बार और बेंच मिलकर ही न्याय की व्यवस्था पूर्ण होती है, लेकिन सरकार न्यायालय में हस्तक्षेप करने के लिए बार को टारगेट कर रही है। इसीलिए सरकार अधिवक्ता अधिनियम 1961 में संशोधन करने की तैयारी कर रही है, यह संशोधन वकीलों की स्वतंत्रता पर सीधे स्तर पर एक प्रहार है जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके खिलाफ हम आगे बढ़कर अपनी लड़ाई को लड़ेंगे, जब तक सरकार अपने फैसले को वापस नहीं लेती है, यह आंदोलन किया जायेगा। कहा गया कि अधिवक्ता न्यायिक व्यवस्था के रथ का पहिया है, यदि इसके अधिकारों, स्वतंत्रता और सुरक्षा की अनदेखी की जायेगी तो यह व्यवस्थ सम्पूर्ण न्यायिक व्यवस्था को कमजोर करेगी। सभी अधिवक्ताओं ने इस लड़ाई में एकजुटता से शामिल होने का संकल्प भी लिया। ज्ञापन में मांग की गई है कि अधिवक्ता संशोधन बिल को तत्काल वापस लिया जाये, अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू किया जाये, अधिवक्ताओं को दस लाख का मेडिक्लेम और दस लाख का बीमा सुविधा दिया जाये, अधिवक्ताओं के लिए पेंशन योजना चलायी जाये। 

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