उर्दू तरक्की के लिए सीएम योगी का प्यार देखकर चौंके लोग

मुजफ्फरनगर। बुधवार को जिला कचहरी का वातावरण चुनावी गरमाहट से परिपूर्ण नजर आया। यहां पर एक तरफ जहां खिली धूप ने लोगों को सर्दी से राहत प्रदान करने का काम किया तो शीतलहर पर हावी होती इस तपिश को बार संघ के चुनाव ने और गरम करने का काम किया। इसी बीच यहां आते जाते लोगों की निगाह जब डीएम दफ्तर के पास एक दिवार पर लगाये गये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक होर्डिंग पर पड़ी तो उनके पैर अनायास ही ठिठकने को विवश हो गये और होर्डिंग पर प्रयोग की गई भाषा का ज्ञान न रखने वाले लोग भी इसको निहारने के लिए विवश नजर आये। यहां पर लोगों को इस सीएम योगी आदित्यनाथ के फोटो और उसके उर्दू भाषा में लिखे गये संदेश को लेकर चौंक गये और अचम्भा व्यक्त करते हुए कई लोगों ने कहा कि यूपी में उर्दू बाजार का नाम बदलकर हिन्दी के नाम पर नई पहचान दिलाने वाले सीएम योगी को कब से उर्दू भाषा से प्रेम हो गया। यहां तक की जब लोगों ने इस होर्डिंग पर सीएम योगी की उर्दू अकादमी उत्तर प्रदेश के सदर के रूप में नई पहचान के रूप में जानकारी मिली तो वो अचम्भित नजर आये।

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दरअसल, उत्तर प्रदेश में जिस प्रकार की सियासत हावी है और पूर्व में जिस प्रकार से प्रदेश के मुखिया के तौर पर योगी आदित्यनाथ ने गैर हिंदू प्रतीकों के आधार पर रखे गये नामों को बदलने की राजनीतिक गतिविधियों को जोर शोर से चलाया, उसी को लेकर उनकी छवि हमेशा ही एक मुस्लिम विरोधी के तौर पर पेश की जाती रही है, जबकि प्रदेश में सीएम योगी ने सबका साथ और सबका विकास को चरितार्थ करते हुए सभी के कल्याण के लिए काम करके दिखाया है। सरकारी योजनाओं में मुस्लिम पात्रों की संख्या इस बात का प्रमाण भी बनती रही है, इसके बावजूद सार्वजनिक तौर पर यूपी में मुख्यमंत्री के तौर पर योगी आदित्यनाथ को अल्पसंख्यक मुस्लिमों के हितों को लेकर जोरदार ढंग से बात करते हुए कम ही देखा गया है। यहां तक की उनके लिए चलाई जा रही विशेष योजनाओं का प्रचार प्रसार भी कम ही होता रहा है, यही कारण है कि बुधवार को लोगों के बीच उर्दू की तरक्की के लिए योगी सरकार की योजनाओं के प्रचार के लिए लगाया गया एक छोटा सा होर्डिंग ही बड़ी चर्चाओं का विषय बन गया।

डीएम दफ्तर के पास जिला बार संघ के चुनाव की मतगणना होने के कारण बुधवार को भारी भीड़ का आलम बना हुआ था। एकाएक यहां पर मीडिया कर्मियों के द्वारा दीवार पर लगाये गये एक सरकारी होर्डिंग के फोटो खींचे जाने लगे तो लोगों के बीच यह होर्डिंग अचानक ही एक बड़ा आकर्षण बन गया। यह होर्डिंग उर्दू भाषा में था और सीएम योगी के फोटो के साथ लगाया गया था। इसका शीर्षक था, सूबे में उर्दू तरक्की की राह पर गमजन है। इसके सहारे उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी की स्कीमें सार्वजनिक की गई थी। इस होर्डिंग के सहारे उर्दू पाठ्य पुस्तकों और संदर्भ पुस्तकों का प्रकाशन, अनुवाद और मुद्रण। शोध कार्य, महोत्सव, सेमिनार, संगोष्ठियां, मुशायरे एवं राज्य स्तरीय महत्वपूर्ण आयोजन। योग्य एवं मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान करना। सिविल सर्विसेज एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग कक्षाएं संचालित करना। साहित्यिक हस्तियों को सम्मानित करना, पुरस्कार, सम्मान आदि उर्दू तरक्की सम्बंधी 15 योजनाओं का उल्लेख किया गया था। इस होर्डिंग को लेकर लोगों में आकर्षण बना तो यहां पर लोग ठहरकर उर्दू भाषा का ज्ञान नहीं होने के बावजूद भी इसको निहारते और चर्चा के दौरान सीएम योगी के उर्दू भाषी होर्डिंग पर फोटो को लेकर एक तौर से अचम्भा व्यक्त करते रहे। यहां से गुजर रहे युवक सुशील कुमार ने अपने साथी के साथ इसको देखा और ठहर गया। सुशील का कहना था कि योगी जी का उर्दू में होर्डिंग पहली बार देखा है। अधिवक्ता विशाल सिंह ने भी इस पर अचम्भा व्यक्त करते हुए कहा कि उर्दू बाजार का नाम बदल देने वाले सीएम योगी उर्दू तरक्की की बात कैसे कर रहे हैं। इसी प्रकार मीडिया कर्मियों को भी यह होर्डिंग एक बड़ी खबर जैसा लगा और फिर कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर इस होर्डिंग की तस्वीर और वीडियो वायरल होने लगी।

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इसमें सबसे बड़ी बात यह रही कि सीएम योगी आदित्यनाथ के उर्दू अकादमी उत्तर प्रदेश के सदर ;अध्यक्षद्ध होने की जानकारी लोगों को मिली। क्योंकि 1972 में गठित उर्दू अकादमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पद पर सीएम योगी तक 20 अध्यक्ष बनाये गये। इनमें 1972 में आनंद नारायण, 1999 में नेपाल सिंह और अब योगी आदित्यनाथ को छोड़कर सभी मुस्लिम समाज से रहे हैं। 2014 में सपा सरकार में शायर नवाज देवबंदी सदर रहे। इसके बाद योगी सरकार में पदमश्री आसिफा जमां और चौधरी कैफ उल वारा तथा अब योगी आदित्यनाथ सदर हैं। 

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