तोहिदा सहित ककरौली बवाल में नामजद सभी 25 लोगों के मुकदमे लड़ेगी सपा

मुजफ्फरनगर। मीरापुर विधानसभा सीट पर हुए उप चुनाव में 20 नवम्बर को मतदान के दिन ककरौली गांव में हुए बवाल के कारण पुलिस द्वारा सपा और एआईएमआईएम के 25 कार्यकर्ताओं को नामजद करते हुए 120 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी बलवे सहित अन्य धाराओं में मुकदमा कायम किया है। इसमें सपा समर्थक बताकर तीन महिलाओं को भी नामजद कर लिया गया। इन महिलाओं ने ककरौली थाना प्रभारी राजीव शर्मा के पिस्टल तानने का विरोध किया था। सपा इन महिलाओं को सम्मानित करने का ऐलान कर चुकी है और अब सपा ने ककरौली बवाल के मुकदमे में नामजद सभी लोगों को न्याय दिलाने के लिए उनके मुकदमे लड़ने के लिए अपनी ओर से अधिवक्ता खड़े करने का निर्णय लिया है।

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सपा जिलाध्यक्ष जिया चौधरी ने बताया कि ककरौली के साथ ही मीरापुर क्षेत्र के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में सपा का वोट रोकने के लिए एक साजिश के तहत सत्ता के इशारे पर पुलिस प्रशासन ने काम किया है। हम ककरौली के साथ ही पूरे विधानसभा क्षेत्र में उन सभी पीड़ितों के साथ हैं, जिनको पुलिस व प्रशासन ने निशाने पर रखते हुए कार्यवाही की जद में लेकर उत्पीड़न किया है। पार्टी ने फैसला किया है कि ककरौली में वोट देने से रोकने वाले थाना प्रभारी की पिस्टल के सामने अड़ने वाली तोहिदा सहित सभी लागों के मुकदमों में सपा की ओर से पैरवी करने के लिए अधिवक्ता लगाये जायेंगे। पार्टी की अधिवक्ता सभा के पदाधिकारी इसके लिए काम करेंगे। साथ ही महिलाओं को लखनऊ ले जाकर सम्मानित किया जायेगा। इसके लिए शीर्ष नेतृत्व से बात करके समय लिया लायेगा।

ककरौली बवाल के मुकदमे में एआईएमआईएम के कार्यकर्ता भी शामिल होने पर उन्होंने कहा कि हमारे लिए वो मतदाता हैं, पुलिस ने ही पार्टीबंदी दिखाई है। वो सभी वोटर हैं। वो वोट देने जा रहे हैं, किसी को नहीं पता था कि वो किसको वोट देंगे। हम उनको न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ेंगे। मीरापुर के परिणाम पर उन्होंने कहा कि यह चुनाव प्रशासन की ताकत पर भाजपा ने जीता है। एनडीए की प्रत्याशी मिथलेश पाल सपा के मुकाबले चुनाव नहीं लड़ी थी, यहां सपा का इलेक्शन प्रशासन के साथ हुआ। औवेसी के प्रत्याशी को प्रशासन ने ही वोट डलवाये हैं। आसपा प्रत्याशी को मुस्लिमों ने वोट नहीं दिया है। फर्जी वोटिंग हुई है। दूसरी सीटों पर आसपा और औवेसी के प्रत्याशियों को ज्यादा वोट नहीं मिल पाई, यहां पर ज्यादा वोट क्यों मिली हैं, जिन गांवों में हमने मतदान प्रभावित होने की शिकायत की, वहां ज्यादा मतदान कैसे हो गई। आसपा का दलित मुस्लिम समीकरण केवल मीरापुर में ही क्यों चला। ये ही सवाल हैं। प्रशासन ने आसपा और एआईएमआईएम को सपा के खिलाफ एक भूत बनाकर पेश किया है।

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