“अब वो कभी नहीं मिलेंगे…” ताबूत से लिपटकर रोती रही मां, देहरादून हादसे में मेजर शुभम शहीद

मेरठ | देहरादून। देहरादून सड़क हादसे में जान गंवाने वाले सेना के मेजर शुभम सैनी का पार्थिव शरीर रविवार को जब मेरठ के उनके पैतृक गांव घसौली पहुंचा, तो माहौल गमगीन हो गया। ताबूत देखते ही चीख-पुकार मच गई। मां और बहन बार-बार बेहोश होती रहीं, जबकि पूरा गांव अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने उमड़ पड़ा।

सेना के जवान जब पूरे सम्मान और प्रोटोकॉल के साथ मेजर शुभम सैनी के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने लगे, तो भाई-बहन खुद को रोक नहीं सके।

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बहन ने आर्मी अफसरों से रोते हुए कहा—

“अब वो हमें कभी नहीं मिलेंगे, बस पांच मिनट देखने दीजिए।”

बड़ा भाई तुषार पुलिसकर्मियों के सामने हाथ जोड़कर भाई के अंतिम दर्शन की गुहार लगाता रहा।

बड़ा भाई तुषार पुलिसकर्मियों के सामने हाथ जोड़कर भाई के अंतिम दर्शन की गुहार लगाता रहा।

मेजर शुभम की मां ताबूत को बार-बार चूमती रहीं। उनकी जुबान से निकल रहे शब्द हर किसी की आंखें नम कर रहे थे—

“ट्रक में मेरा बेटा दूल्हा बनकर जा रहा है… आज उसकी बारात निकल रही है।”

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मेरठ के घसौली गांव में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। बड़े भाई तुषार सैनी ने चिता को मुखाग्नि दी। गांव के हर व्यक्ति की आंखों में आंसू और सीने में गर्व था।

मेजर शुभम सैनी शनिवार सुबह उत्तराखंड में चकराता से देहरादून जा रहे थे। इसी दौरान उनकी कार अनियंत्रित होकर करीब 50 मीटर गहरी खाई में गिर गई।

कई घंटों की मशक्कत के बाद रेस्क्यू कर उन्हें देहरादून के सैनिक अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

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पिता ने बताया कि शुभम ने आर्मी स्कूल से इंटरमीडिएट के बाद 2015 में NDA से चयन पाया।

2019 में देहरादून से पासिंग आउट

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प्रमोशन पाकर बने मेजर

तीनों भाई-बहन अविवाहित थे। बड़े भाई की शादी 18 फरवरी को तय थी।

पिता ने बताया कि हादसे से एक दिन पहले शुक्रवार को शुभम से फोन पर बात हुई थी।

उन्होंने शादी की तैयारियों के बारे में पूछा और छुट्टी लेकर घर आने की बात कही थी।

लेकिन किसे पता था कि वह आखिरी बातचीत होगी।

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