देहरादून- ग्लेशियरों के टूटने से निचले क्षेत्रों में बाढ़ का अधिक खतरा है। जलाशयों की क्षमता कम होने से विद्युत उत्पादन में कमी आएगी। प्रदेश की नदियों का बढ़ता जलस्तर चिंता का विषय हैए जिसका एक मुख्य कारण ग्लेशियरों का बड़ी मात्रा में टूटना है। भारी बारिश और ग्लेशियरों के पिघलने से नदियों में पानी की मात्रा बढ़ रही है जिससे निचले इलाकों में गाद ;सिल्टद्ध और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है, भू.वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि ग्लेशियरों की स्थिति में सुधार नहीं होता है तो भविष्य में नदी किनारे बसे निचले क्षेत्रों में बाढ़ का जोखिम और भी बढ़ जाएगा। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के भू.विज्ञान विभाग के प्रोफेसर एचसी नैनवाल के अनुसार उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ग्लेशियर हर साल 5 से 20 मीटर तक पीछे खिसक रहे हैं। इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि उनकी मोटाई लगातार कम हो रही है। उन्होंने बताया कि हैंगिंग ग्लेशियर ;लटकते हुए ग्लेशियरद्ध ज्यादा टूटते हैं जिससे हिमस्खलन की घटनाएं बढ़ती हैं। प्रोफेसर नैनवाल ने ग्लेशियरों के तेजी से टूटने के पीछे पृथ्वी के तापमान में बदलाव और गैसों के उत्सर्जन को मुख्य कारण बताया है। जंगलों में लगने वाली आग से निकलने वाली गैसों का भी इन पर बुरा असर पड़ रहा है।

एम.जी. पब्लिक स्कूल में फ्री आई कैम्प में 118 रोगियों का उपचार
शिविर में रोगियों को दवाईयों का निःशुल्क वितरण, 36 मोतियाबिंद के मरीजों का होगा फ्री ऑपरेशन मुजफ्फरनगर। एमजी. पब्लिक स्कूल परिसर में रविवार 26, अपै्रल 2026 को निःशुल्क मासिक नेत्र रोग चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का शुभारंभ एम.जी. चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष सतीश चंद गोयल ने किया। इस अवसर पर एम.जी. पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के उपाध्यक्ष विनीत सिंघल एवं अन्य अतिथि भी मौजूद रहे। प्रधानाचार्या श्रीमती मोनिका गर्ग द्वारा अतिथियों, चिकित्सक एवं चिकित्सा कर्मियों और उपचार परामर्श लेने आये नेत्र रोगियों का विद्यालय प्रांगण में स्वागत किया गया। प्रधानाचार्या श्रीमती मोनिका गर्ग ने बताया कि प्रत्येक माह के चौथे रविवार को वरदान धर्मार्थ नेत्र चिकित्सालय, प्रेमपुरी





