गोंडा (उत्तर प्रदेश)। अस्पताल, जहां दर्द से कराहते इंसान इलाज की आस लेकर आते हैं… लेकिन गोंडा मेडिकल कॉलेज के ऑर्थो वार्ड में नज़ारा कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। यहां मरीजों के लिए रखे गए बेड पर इंसान नहीं, बल्कि आवारा कुत्ते चैन की नींद सोते नजर आए। एक नहीं, दो नहीं—एक ही बेड पर तीन-तीन कुत्ते आराम फरमाते दिखे।
यह दृश्य किसी कल्पना का हिस्सा नहीं, बल्कि उस वीडियो का सच है जिसे वार्ड में भर्ती मरीज के एक तीमारदार ने मोबाइल कैमरे में कैद किया। वीडियो सामने आते ही सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
इमरजेंसी चालू, मगर हालात बेकाबू
मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी सेवाएं बहाल होने की औपचारिक घोषणा हो चुकी है, लेकिन ज़मीनी हकीकत डराने वाली है। जिन बेड पर घायल और ऑपरेशन के मरीजों को लेटना चाहिए, वहां कुत्तों का कब्ज़ा है। मरीज और उनके परिजन या तो कुर्सियों पर बैठे हैं या ज़मीन पर रात काटने को मजबूर।
“पत्र लिख दिया गया है…”
मामले पर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने सफाई देते हुए कहा कि अस्पताल परिसर से कुत्तों को पकड़ने के लिए नगर पालिका को पत्र लिख दिया गया है लेकिन उनकी ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। प्रधानाचार्य ने यह भी बताया कि साफ-सफाई का काम देखने वाली कंपनी को भी इस लापरवाही के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
लेकिन सवाल यह है कि जब वीडियो सामने आया तब कार्रवाई क्यों, उससे पहले क्यों नहीं?
इलाज से ज्यादा संक्रमण का डर
ऑर्थो वार्ड जैसे संवेदनशील विभाग में आवारा जानवरों की मौजूदगी केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि संक्रमण को खुला न्योता है। हड्डी के ऑपरेशन से गुजर रहे मरीजों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।
सिस्टम की बेपरवाही की चीख
यह घटना सिर्फ गोंडा मेडिकल कॉलेज की नहीं, बल्कि उस सिस्टम की कहानी है जहां कागज़ों में सब कुछ दुरुस्त दिखता है, लेकिन हकीकत में मरीजों से पहले कुत्तों को बेड मिल जाता है।
अब सवाल यह नहीं कि वीडियो वायरल हुआ या नहीं—
सवाल यह है कि क्या इस शर्मनाक तस्वीर के बाद भी जिम्मेदारों की नींद टूटेगी?






