जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ के छतरू जंगल इलाके में सेना का कुत्ता टायसन ने अदम्य साहस दिखाते हुए जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकवादियों को ट्रैक करने में निर्णायक भूमिका निभाई। गोली लगने के बावजूद टायसन पीछे नहीं हटा और ऑपरेशन त्राशी-I को सफल बनाने में अहम साबित हुआ। रविवार, 22 फरवरी, 2026 को मिले खुफिया इनपुट के आधार पर आर्मी, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने छतरू क्षेत्र के एक धोक पर कार्रवाई की, जहां बड़े आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना थी।
जैसे ही स्पेशल फोर्स अंदर पहुंची, सेना का कुत्ता टायसन, जो भारतीय सेना की 2 पैरा स्पेशल फोर्सेज का एलीट जर्मन शेफर्ड और के-9 ट्रूपर है, को निरीक्षण के लिए आगे बढ़ाया गया। अपनी ट्रेनिंग के मुताबिक टायसन सीधे संदिग्ध स्थान की ओर बढ़ा। अचानक उसकी मौजूदगी से आतंकवादी घबरा गए और फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग के दौरान टायसन के दाहिने पैर के अगले हिस्से में गोली लगी। भारी खून बहने और दर्द के बावजूद वह नहीं रुका। वह लगातार आगे बढ़ता रहा और झोपड़ी के अंदर आतंकवादियों की सही स्थिति का संकेत देता रहा।
टायसन के दबाव में आतंकवादी एक कोने में सिमट गए, जिससे पैरा एसएफ को जवाबी कार्रवाई का रणनीतिक मौका मिला। इस कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकवादी मार गिराए गए, जिनमें सैफुल्लाह नाम का एक टॉप कमांडर भी शामिल था, जो लगभग दो वर्षों से सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बच रहा था।
“टायसन ने टीम के लिए पहली गोली खाई। उसकी वफादारी की वजह से हम बिना किसी इंसानी नुकसान के यह ऑपरेशन खत्म कर पाए।” घायल होने के तुरंत बाद आर्मी के डॉक्टरों ने टायसन को स्थिर किया और उसे उधमपुर के कमांड हॉस्पिटल में एयरलिफ्ट किया गया। आज सुबह तक की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, टायसन की हालत स्थिर है और वह इलाज पर अच्छा रिस्पॉन्स दे रहा है।
ऑपरेशन के बाद से सोशल मीडिया पर “2 पैरा के बहादुर लड़के” के नाम से टायसन की बहादुरी को सलाम किया जा रहा है। कई लोग उसकी असाधारण सेवा के लिए उसे बहादुरी सम्मान दिए जाने की मांग कर रहे हैं। सेना का कुत्ता टायसन अब सिर्फ एक के-9 ट्रूपर नहीं, बल्कि साहस, वफादारी और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक बन चुका है।






