ओआईसी पर महबूबा मुफ्ती का हमला उस समय तेज हो गया जब उन्होंने ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों तथा अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर संगठन की चुप्पी को मुस्लिम जगत के साथ बड़ा विश्वासघात बताया। पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि संकट की इस घड़ी में ओआईसी का मूक दर्शक बने रहना बेहद निराशाजनक है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को इस्लामिक सहयोग संगठन की कड़ी आलोचना की।
उन्होंने ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों पर ओआईसी की चुप्पी पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि जब अमेरिका और इजरायल ईरान की संप्रभुता के खिलाफ खुलेआम आक्रामकता कर रहे हैं, तब ओआईसी मूक दर्शक बना हुआ है। महबूबा मुफ्ती ने अपनी पोस्ट में कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत पर ओआईसी की चुप्पी और दोष ईरान पर मढ़ने की कोशिश बेहद चिंताजनक और शर्मनाक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ओआईसी को इस दुस्साहसिक हमले की कड़ी निंदा करनी चाहिए थी, लेकिन उसने ईरान पर ही दोष मढ़ने का प्रयास किया। ओआईसी पर महबूबा मुफ्ती का हमला यहीं नहीं रुका। उन्होंने संगठन के रुख को ‘एपस्टीन गैंग’ की कार्रवाइयों का परोक्ष समर्थन बताया।
उनका कहना था कि खुले हमले की निंदा करने के बजाय चुप्पी साधना मुस्लिम उम्माह की सामूहिक अंतरात्मा और हितों के साथ बड़ा विश्वासघात है। यह पहली बार नहीं है जब ओआईसी की भूमिका पर सवाल उठे हों। पूर्व में भी कई मौकों पर इसे पाकिस्तान का ‘प्रॉक्सी’ बताकर आलोचना की जाती रही है, जहां कश्मीर पर भारत-विरोधी बयान जारी किए जाते हैं, लेकिन अन्य मुस्लिम मुद्दों पर चुप्पी साध ली जाती है। गौरतलब है कि शनिवार तड़के अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की जान चली गई।
इस घटना के बाद वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव गहरा गया है। इसी पृष्ठभूमि में ओआईसी पर महबूबा मुफ्ती का हमला सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई बहस को जन्म दे दिया है।






