गाजीपुर। बुधवार को बलिया जाते वक्त गाजीपुर में एक जगह ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का काफिला अचानक रुक गया। वजह सड़क किनारे या बस्तियों के ऊपर खतरनाक ढंग से लटकते बिजली के तार थे। मौके पर निरीक्षण हुआ, फटकार पड़ी, और फिर कार्रवाई इतनी तेजी से चली कि मेहरोर उपकेंद्र के अवर अभियंता धर्मेंद्र पाल को निलंबित कर दिया गया, जबकि एसडीओ मनोज वर्मा और अधिशासी अभियंता प्रवीण कुमार को चार्जशीट थमा दी गई।
यह कार्रवाई पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक शंभु कुमार के निर्देश से की गई। वाराणसी जोन-द्वितीय के मुख्य अभियंता अनिल वर्मा ने भी निलंबन की पुष्टि की और कहा कि जल्द दूसरे JE की तैनाती की जाएगी। इसका सीधा मतलब है कि मंत्री का यह दौरा सिर्फ नाराजगी तक सीमित नहीं रहा — विभागीय जिम्मेदारी तय करने तक गया।
काफिला रुका, गांव में पहुंचे मंत्री, और वहीं से शुरू हुआ दबाव
रिपोर्ट के मुताबिक एके शर्मा बुधवार को बलिया की ओर जा रहे थे। महड़ौर मार्ग पर हालात देखकर उन्होंने काफिला रुकवाया और एक गांव में पहुंचकर बिजली व्यवस्था की पड़ताल की। वहां कई जगह तार नीचे लटके मिले। यह सिर्फ तकनीकी कमी नहीं थी; ऐसे तार किसी भी राहगीर, किसान, बच्चे या दुपहिया चालक के लिए खतरा बन सकते हैं। मंत्री ने मौके पर ही अफसरों को फटकार लगाई और फिर पूर्वांचल डिस्कॉम के एमडी शंभु कुमार से बात कर त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया।
इसके बाद विभाग में हलचल तेज हो गई। मौके की नाराजगी सीधे प्रशासनिक फैसले में बदली। यही वजह है कि JE पर निलंबन और दो वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों पर चार्जशीट जैसी कार्रवाई एक साथ सामने आई। सरकारी कामकाज में अक्सर फाइलें धीरे चलती हैं, लेकिन यहां संदेश अलग था — फील्ड में ढिलाई दिखी तो जवाब भी उसी दिन मांगा जाएगा।
उसी दौरे के दौरान कासिमाबाद में कार्यकर्ताओं ने ऊर्जा मंत्री का स्वागत भी किया। वहां एके शर्मा ने कहा कि क्षेत्र में बिजली व्यवस्था में जहां-जहां कमी है, उसमें तत्काल सुधार कराया जाएगा। यह बयान छोटा है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों अर्थ रखता है। एक तरफ निरीक्षण में सख्ती, दूसरी तरफ सार्वजनिक भरोसा — सरकार ने दोनों संकेत एक साथ दिए।
गाजीपुर की यह कार्रवाई सिर्फ एक लाइन की खबर नहीं
गाजीपुर बिजली कार्रवाई को अगर सिर्फ “JE सस्पेंड” तक पढ़ा जाए, तो आधी तस्वीर ही दिखेगी। पूरी तस्वीर तब बनती है जब उसी खबर में यूपी पॉवर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल के निर्देश भी सामने आते हैं। उन्होंने 1912 पर आने वाली शिकायतों का उसी दिन समाधान सुनिश्चित करने को कहा है, खासकर उन उपभोक्ताओं के लिए जिनका प्रीपेड स्मार्ट मीटर निगेटिव बैलेंस की वजह से कट गया, लेकिन पैसा जमा करने के बाद भी कनेक्शन बहाल नहीं हुआ।
डॉ. गोयल ने यह भी कहा कि शिकायत निस्तारण की निगरानी के लिए डिस्कॉम में अलग सेल बने, रीचार्ज के बाद तत्काल कनेक्शन जोड़ने के लिए कंट्रोल रूम स्थापित हो, और 1912 की समीक्षा हर 15 मिनट पर टास्क फोर्स करे। इसके साथ ऐसे इलाकों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को प्राथमिकता देने की बात कही गई, जहां बिल समय से नहीं जमा हो रहे। गर्मी को देखते हुए मरम्मत कार्य जल्द पूरा कराने और ट्रांसफॉर्मर फुंकने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
यहां एक अहम बात और है। 1912 कोई अनौपचारिक नंबर नहीं, बल्कि UPPCL की आधिकारिक शिकायत और सूचना सेवा के तौर पर दर्ज है। UPPCL के आधिकारिक पोर्टल पर 1912 और 1800-410-1912 को बिजली संबंधी सहायता के लिए जारी संपर्क नंबर बताया गया है। यानी डॉ. गोयल के निर्देश सीधे उसी औपचारिक शिकायत व्यवस्था को तेज करने की कोशिश हैं, जिसका इस्तेमाल प्रदेश भर के उपभोक्ता करते हैं।






