किसानों की आपत्तियों और सुझावों के बाद केंद्र सरकार ने फिलहाल वापस लिया मसौदा, संवाद आधारित नीति निर्माण की सराहना
मुजफ्फरनगर। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित गन्ना (नियंत्रण) आदेश-2026 के मसौदे को फिलहाल वापस लेने के निर्णय का किसान संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने स्वागत किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आदेश को लागू करने से पहले किसानों, उद्योग जगत और अन्य हितधारकों से आपत्तियां एवं सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। इसके बाद प्राप्त सुझावों के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। इस फैसले को किसान हितों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और संवाद आधारित नीति निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित गन्ना (नियंत्रण) आदेश-2026 को फिलहाल वापस लेने के निर्णय पर किसान संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार का आभार जताया है। मंत्रालय के सचिव जयवीर सिंह द्वारा कृषि भवन से जारी आदेश में कहा गया है कि गन्ना नियंत्रण आदेश-2026 के संबंध में विभिन्न पक्षों से प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर विचार किए जाने के बाद ही सरकार ने आदेश के मसौदे पर व्यापक चर्चा और विचार-विमर्श सुनिश्चित करने के लिए फिलहाल इसे वापस लेने का निर्णय लिया है।

राष्ट्रीय लोकदल के युवा विंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिजनौर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चंदन सिंह चौहान ने केंद्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि प्रस्तावित गन्ना (नियंत्रण) आदेश-2026 के ड्राफ्ट को वापस लेना किसानों, गुड़ एवं खांडसारी उद्योग तथा अन्य हितधारकों की भावनाओं का सम्मान है। उन्होंने कहा कि विभिन्न वर्गों से प्राप्त सुझावों को गंभीरता से लेते हुए मसौदे पर पुनर्विचार का निर्णय सरकार की संवाद और सहमति आधारित नीति निर्माण की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वहीं भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि किसान संगठनों की लगातार उठाई गई आवाज और प्रदेश सरकार के प्रभावी सुझावों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। उन्होंने कहा कि किसान हितों से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर केंद्र सरकार द्वारा लिया गया निर्णय किसानों के लिए राहत भरा है।
धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से भेजे गए मजबूत सुझावों तथा राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी द्वारा प्रधानमंत्री के समक्ष प्रभावी पैरोकारी के कारण यह निर्णय संभव हो सका। उन्होंने दावा किया कि भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने भी इस विषय को मजबूती से उठाया और किसानों की चिंताओं को सरकार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किसान संगठन के पदाधिकारियों ने किसान हित में लिए गए इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी, भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश सिंह चौहान तथा किसान नेता चौधरी राजेंद्र मलिक का आभार व्यक्त किया है। किसान नेताओं का कहना है कि गन्ना किसानों, गुड़ और खांडसारी उद्योग से जुड़े लोगों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा पुनर्विचार का निर्णय लिया जाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मजबूती का प्रतीक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में तैयार की जाने वाली किसी भी नीति में किसानों और संबंधित हितधारकों के सुझावों को प्राथमिकता दी जाएगी।






