सजा-ए-मौतः मां-बेटे के हत्यारे को फांसी की सजा, 15 साल बाद फैसला

अवैध सम्बंधों में बरेली के रहीस ने मां-बेटे का किया था कत्ल, प्रेमी के साथ शादी की जिद बनी थी हत्या की वजह

मुजफ्फरनगर। लगभग 15 वर्ष पुराने चर्चित दोहरे हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी रईस उर्फ रहीस उर्फ जहूर हसन को फांसी की सजा सुनाई है। मां और उसके छह वर्षीय बेटे की निर्मम हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने दोषी को मृत्युदंड से दंडित किया। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले से पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने की उम्मीद पूरी हुई है।

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अभियोजन पक्ष के अनुसार, बरेली जनपद के पराबाहुद्दीनपुर, बिसातगंज निवासी रईस उर्फ रहीस उर्फ जहूर हसन ने सात नवंबर 2011 को बकरीद के दिन राजेश देवी और उसके छह वर्षीय पुत्र हिमांशु को सलेमपुर क्षेत्र से एक टैम्पू में बैठाया था। इसके बाद वह दोनों को चरथावल क्षेत्र के अलावलपुर मोड़ के निकट गन्ने के खेत में ले गया। जांच में सामने आया कि राजेश देवी आरोपी के साथ संबंधों को लेकर उसके साथ रहने की जिद कर रही थी। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। विवाद बढ़ने पर आरोपी ने पहले महिला के साथ मारपीट की, जिससे वह अचेत हो गई। इसके बाद आरोपी ने महिला और उसके मासूम बेटे पर ईंट से ताबड़तोड़ प्रहार कर उनकी हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था।

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इस जघन्य दोहरे हत्याकांड ने उस समय पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की और साक्ष्य जुटाकर आरोपी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के अपराध को सिद्ध किया। करीब डेढ़ दशक तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने मामले को दुर्लभतम श्रेणी का अपराध मानते हुए दोषी को फांसी की सजा सुनाई। अदालत के फैसले के बाद न्यायालय परिसर में मामले को लेकर चर्चा का माहौल रहा। इस निर्णय को गंभीर अपराधों के विरुद्ध कड़ा संदेश माना जा रहा है। मामले में फैसला आने के साथ ही वर्ष 2011 में हुई मां-बेटे की दर्दनाक हत्या के प्रकरण का कानूनी अध्याय भी निर्णायक रूप से समाप्त हो गया। पीड़ित परिवार और क्षेत्र के लोगों ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया।

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